कठुआ। समाज जैसे-जैसे तरक्की की ओर बढ़ रहा है, वैसे ही मानवीय संवेदनाएं भी बढ़ती जा रही हैं। इस दिशा में पुलिस विभाग पीछे नहीं है। पुलिस ने एक शव की बिना पड़ताल किए ही उसे दफना दिया। इस मामले में परिजनों को ही शव मिलने के स्थान पर उसका पर्स पाया।
उल्लेखनीय है कि सोमवार को करीब तीन बजे छन्न दित्याल में रेलवे ट्रैक के निकट झाड़ियों की सफाई करते समय जीआरपी को क्षत विक्षत हालत में एक शव मिला था। जीआरपी ने इसे पुलिस के हवाले कर दिया। पुलिस ने उसकी जांच पड़ताल करने की बजाए आनन-फानन में दफना दिया। इस मामले में चौंकाने वाला तथ्य तब सामने आया जब जम्मू के अखनूर का एक परिवार शव मिलने की जानकारी के बाद कठुआ पहुंचा। यहां पूछताछ में जम्मू से आए मोहन सिंह को पुलिस ने बताया कि शव का पोस्टमार्टम करा कर दफना दिया गया है।
परिजनों ने पुलिस पर आरोप लगाया अधिक पूछताछ और शव कहां से मिला इसमें भी पुलिस ने सहयोग नहीं किया। आखिरकार उन्होंने अपने स्तर पर ही तलाश शुरू कर दी। हैरत की बात यह रही कि जिस जगह शव मिला ठीक उसके पास ही मोहन सिंह को बुधवार को एक मोबाइल के टुकड़े और पर्स मिला, जिसमें से मिले पहचान पत्रों के आधार पर परिजनों ने शव की पहचान रोमेश सिंह के रूप में की। मृतक मोहन का भाई ही था, जो अक्टूबर 2017 के दौरान रेल से लापता हो गया था। मृतक के भाई ने बताया कि उस समय ट्रेन के अन्य मुसाफिरों ने इस बात की तस्दीक की थी कि रोमेश सिंह पुत्र चैन सिंह निवासी हमीरपुर कोना, तहसील परगवाल, गूड़ा मन्हासां, जम्मू को दियालाचक रेलवे स्टेशन तक देखा गया है, जिसके बाद वो लापता हो गया। परिजनों को शक था कि वो शायद ट्रेन से गिर गया जिस संदर्भ में जीआरपी जम्मू मे गुमशुदगी दर्ज कराई गई।
परिवार ने संवेदनहीनता का आरोप लगाते हुए कहा कि एक तो जिस जगह रोमेश लापता हुआ था उसी के आसपास शव मिलने के बाद पुलिस ने परिवार को सूचित नहीं किया और न ही शव के आसपास कोई तलाश की, जिससे उसकी पहचान हो पाती। यही नहीं पुलिस ने कंकाल बन चुके शव का पोस्टमार्टम कराया, जबकि पहचान के लिए डीएनए कराया जाना चाहिए था। उसके बाद भी बिना परिवार को सूचित किए शव को दफना दिया गया, जिसका पुलिस उचित जवाब नहीं दे पाई है। परिवार के सदस्य शव को रीति अनुसार अंतिम संस्कार के लिए हासिल करना चाहते हैं।