तेजधार हथियार से चोट पहुंचाने के मामले में आरोपियों को कोर्ट ने किया बरी
अदालत से ... का लोगो लगाएं
संवाद न्यूज एजेंसी
कठुआ। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने तेजधार हथियारों से चोट पहुंचाने के मामले में सबूतों के अभाव में दो आरोपियों को बरी किया है। आदेश के मुताबिक, अभियोजन पक्ष अपराध को साबित करने में विफल रहा है। लिहाजा, चालान को खारिज कर आरोपियों को दोष मुक्त किया जाता है।
मामला 1 जनवरी 2012 का है। जब जिला अस्पताल में भर्ती घायल सुदेश चंद्र पुत्र पंडित तारा मणि निवासी वार्ड पांच कठुआ ने पुलिस को बताया कि सुबह करीब 9:15 बजे वह दुकान बंद कर आ रहा था। घर के पास पहुंचा तो दो अज्ञात लोगों ने जान से मारने की नीयत से उसके सिर पर तेजधार हथियार से वार किया। वह गंभीर रूप से घायल हो गया। शोर मचाने पर उसके परिवार के सदस्य और अन्य लोग मौके पर पहुंचे। तब तक आरोपी घटनास्थल से भाग गया था।
घायल के बयान पर पुलिस ने आरपीसी की धारा 323/307 के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की। पुलिस ने 9 जनवरी 2013 को आरोपी राम दास निवासी हटली मोड़ और सनी शर्मा निवासी वार्ड छह कठुआ को गिरफ्तार किया। आरोपियों के खिलाफ 25 जनवरी 2015 को कोर्ट में चालान पेश किया गया। हालांकि जिला सत्र न्यायाधीश ने 19 सितंबर 2015 को दोनों आरोपियों को हत्या प्रयास मामले में चल रही सुनवाई में पहले ही बरी किया जा चुका था। इसके बाद दो अन्य आरोपों को लेकर मामले की सुनवाई मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की ओर से की गई।
अभियोजन पक्ष की ओर से छह गवाहों को पेश किया गया। कोर्ट के मुताबिक किसी भी गवाह ने अभियोजन पक्ष के मामले की पुष्टि नहीं की। जांच अधिकारी और डॉक्टर की गवाही को अभियोजन पक्ष ने अदालत में पेश ही नहीं किया। इससे मेडिकल रिपोर्ट, मेडिकल रिकॉर्ड व प्रमाणपत्र अप्रमाणित हो जाते हैं। अभियोजन पक्ष संदेह से परे आरोपियों के खिलाफ दोष साबित करने पर विफल रहा है। लिहाजा, चालान को खारिज किया जाता है।