प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के बारे में सही से जानकारी नहीं मिलने से उपभोक्ता असमंजस में हैं। बीपीएल उपभोक्ता तय नहीं कर पा रहे हैं कि कनेक्शन लिया जाए या नहीं।
इस वर्ष एक मई से शुरू हुई प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के लिए जिले में गैस एजेंसियों में होड़ लग गई है। राज्य भर में पिछले चार दिन से इस पर तेजी से काम किया जा रहा है, लेकिन इसमें अभी में अभी से कई खामियां सामने आने लगी हैं। तकनीकी पहलुओं के बारे में उपभोक्ताओं को प्राथमिक स्तर पर ही अवगत नहीं कराया जा रहा है।
दरअसल, प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना को इस मकसद से शुरू किया गया है कि गृहणियों की रसोई में सुरक्षा और उनकी सेहत को सुनिश्चित किया जा सके। कोयले और पारंपरिक लकड़ी के इस्तेमाल को कम करने के लिए एलपीजी की तरफ लोगों का रुझान बढ़ाया जा सके।
इसके तहत बीपीएल श्रेणी में आने वाली महिलाओं को मुफ्त एलपीजी कनेक्शन मुहैया कराया जाएगा। यही नहीं, स्टोव और रिफिल के लिए ईएमआई की सुविधा भी दी जा रही है, लेकिन जिले में गैस एजेंसियों द्वारा लगाए जा रहे शिविर हवा हवाई साबित हो रहे हैैं। यहां तक कि इन शिविरों में एक ही परिवार की सभी महिला बीपीएल सदस्यों को आवेदन करने के लिए कहा जा रहा है। यही नहीं, नए उपभोक्ताओं को जोड़ने के लिए स्कीम के तकनीकी पहलुओं को भी नहीं बताया जा रहा है।
एचपीसीएल के रीजनल अधिकारी अजय सिंह ने बताया कि वेरिफिकेशन के बाद उपभोक्ताओं को निशुल्क गैस कनेक्शन दिया जा रहा है। गैस स्टोव और रिफिल के लिए ईएमआई उपभोक्ताओं से ही वसूल की जानी है। यानी यदि किसी ने इस योजना के तहत नया गैस कनेक्शन हासिल किया है तो उसे अगले ग्यारह रिफिल तक सब्सिडी नहीं मिलेगी।
यह सब्सिडी सीधे सरकारी खाते में चली जाएगी। सिलेंडर की पूरी कीमत इन उपभोक्ताओं को ही चुकानी पड़ेगी। वहीं, बीपीएल कैटेगरी में घर में
सिर्फ एक रसोई होने पर और पूर्व में गैस कनेक्शन न होने पर ही वेरिफिकेशन के बाद कनेक्शन दिया जाएगा। इसके लिए आधार नंबर और बैंक खाता होना जरूरी है।