कही आशा तो कहीं निराशा, किसान चाहते थे खादों और कीटनाशकों पर राहत
संवाद न्यूज एजेंसी
कठुआ। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की तरफ से पेश किया गया बजट पर शहर के लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रिया रहीं। कुछ लोग इसे लंबे समय बाद केंद्र सरकार की ओर से दी जाने वाली बड़ी राहत बता रहे हैं, वहीं कुछ को बजट पसंद नहीं आ रहा। लोगों का कहना है कि सरकार के इस बजट से आम आदमी को काफी उम्मीदें थीं। वित्त मंत्री ने इस बजट में कई बड़े ऐलान भी किए, लेकिन मंहगाई और बेरोजगारी जैसी समस्याओं से निपटने के लिए कोई प्रावधान न होना चिंता में डाल गया।
कृषि आधारित अर्थव्यवस्था वाले देश के केंद्रीय बजट से काफी निराशा हुई। बजट में किसान क्रेडिट कार्ड की सीमा 3 लाख रुपये से बढ़ाकर 5 लाख रुपये की गई। इसके अलावा खाद, बीज और खेती में इस्तेमाल होने वाले कीटनाशकों में भी किसानों को राहत दिए जाने की जरूरत थी। देश की बड़ी आबादी की जीविका कृषि पर आधारित है और उनका योगदान भी देश की अर्थव्यवस्था के लिए जरूरी है।
प्रेम कृष्ण, किसान
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केंद्र सरकार के बजट में कई तरह की छूट का प्रावधान रखा गया है। इस बजट में देश की बड़ी आबादी का हिस्सा युवाओं की अनदेखी की गई। वे बेरोजगारी से बेहाल हैं। आर्थिक तंगी के शिकार इस वर्ग के पास न तो आय है और बचत। ऐसे में सरकार को इस बजट के माध्यम से युवाओं सीधे तौर पर रोजगार उपलब्ध कराने की घोषणा करनी चाहिए थी।
जीतराज रतनिया, युवा बेरोजगार
टैक्स स्लैब में छूट के साथ मिली अन्य छूट पर नजर डालें तो बजट बाजार दृष्टिकोण से प्रगतिशील दिखाई दे रहा है। इसके अलावा स्वास्थ्य सेवाओं के लिए रखे गए प्रावधान भी सराहनीय हैं। इस बजट में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है जो हमारे घरेलू मासिक बजट को बेहतर बना सके। इसकी सबसे ज्यादा उम्मीद थी।
सत्यदीप शर्मा, सरकारी कर्मचारी