कठुआ। विश्व मौसम विज्ञान दिवस पर वेबिनार का आयोजन जिला एग्रो मेट्रालॉजी यूनिट कृषि विज्ञान केंद्र कठुआ और रियासी में किया गया। पूर्व चेतावनी, प्रारंभिक कार्रवाई विषय पर आयोजित वेबिनार के दौरान वक्ताओं ने कृषि में मौसम के पूर्वानुमान के महत्व पर प्रकाश डाला।
शेर-ए-कश्मीर कृषि विज्ञान और प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. जेपी शर्मा के नेतृत्व और निदेशक विस्तार प्रो. एसके गुप्ता के मार्गदर्शन में आयोजित वेबिनार में विषय विशेषज्ञ कृषि मौसम विज्ञान डॉ. लोबजैंग स्टेनजेन ने प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए कार्यक्रम की शुरुआत की। जिसमें में रियासी और कठुआ जिलों के विभिन्न गांवों के किसानों, सरपंचों, पंचों, कृषि, बागवानी विभाग और संबद्ध विभागों के अधिकारी, कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक व अन्य स्टाफ मौजूद रहा। वहीं कृषि विज्ञान केंद्र रियासी के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. बनारसी लाल, कृषि विज्ञान केंद्र कठुआ के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. विशाल महाजन, कृषि विज्ञान केंद्र कठुआ के विषय विशेषज्ञ कृषि विस्तार डॉ. ब्रजेश अजरावत ने प्रतिभागियों को विभिन्न गतिविधियों विशेष रूप से कृषि मौसम विज्ञान सेवाओं के बारे में जानकारी दी।
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग जम्मू-कश्मीर के निदेशक सोनम लोटस, शेर-ए-कश्मीर कृषि विज्ञान और प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय की कृषि संकाय की डीन डॉ. रैहाना हबीब कंठ मुख्य वक्ता रहीं। अपने संबोधन में डॉ. रैहाना ने कृषि मौसम विज्ञान के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि पूर्वसूचना से फसल नुकसान को कम किया जा सकता है। उन्होंने बेहतर परिणामों के लिए जमीनी स्तर पर कृषि मौसम सलाह के प्रसार के लिए जिला कृषि मौसम विज्ञान यूनिट के प्रयासों की भी सराहना की। इस मौके पर डॉ. आशु शर्मा, पंकज मेहरा, प्रीति चौधरी आदि कृषि वैज्ञानिकों ने भी अपना योगदान दिया।