इसे विडंबना ही कहेंगे की शिक्षा विभाग की गलत नीति ने जुथाना पंचायत के कुल्हाड़ के कई बच्चों को शिक्षा की अलख से दूर कर दिया है।
मंत्रालय द्वारा आदेश जारी होने के बाद विभाग ने लगभग 200 स्कूलों का विलय तो कर दिया, लेकिन इनमें से कई स्कूल ऐसे हैं जहां के बच्चों को आज भी कई नाले, खड्ड पार करने को मजबूर होना पड़ता है। कई विलय किए गए स्कूल तो ऐसे हैं जिनकी गांव से दूरी चार किलोमीटर से भी अधिक है।
ऐसा ही एक गांव बिलावर विधानसभा क्षेत्र की जुथाना पंचायत का कुल्हाड़ है, जिसके सरकारी प्राइमरी स्कूल का निकटवर्ती लाहड़ी के साथ इस सत्र से विलय कर दिया गया।
कुल्हाड़ और लाहड़ी में चार किलोमीटर की दूरी है, ऐसे में बच्चों को रास्ते में पड़ती खड्ड को पार करना पड़ता है। अभिभावकों को बच्चों की शिक्षा के साथ साथ उनकी सुरक्षा की चिंता बनी हुई है।
कुल्हाड़ के ग्रामीण विभागीय अधिकारियों के साथ साथ उप मुख्यमंत्री से भी गुहार लगा चुके हैं। महीनों बाद सोमवार को ग्रामीण मुख्य शिक्षा अधिकारी से मिले तो उचित जबाव नही मिला।
शिष्टमंडल में शामिल ठाकुर मोहिंद्र सिंह, अशोक सिंह, सुभाष सिंह आदि ने कहा कि बच्चों का भविष्य अंधकारमय हो गया है। उन्होंने कहा कि बरसात के दिनों में खड्ड में पानी उफान पर रहता है, जिसके चलते बच्चों की जान पर बन
आती है।
ऐसे में अभिभावकों ने बच्चों को कई महीने से स्कू ल नहीं पहुंचा है। उप मुख्यमंत्री से मुलाकात के बाद मुख्य शिक्षा अधिकारी ने भी भरोसा दिलाया था कि स्कूल को गांव से शिफ्ट नहीं किया जाएगा लेकिन अब विभागीय अधिकारी किराए की इमारत का बहाना बनाकर बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि यदि जल्द फैसले पर पुनर्विचार नहीं किया गया तो ग्रामीण प्रदर्शन के लिए मजबूर हो जाएंगे।