राज्य के लिए वर्तमान समय में बेरोजगारी सबसे बड़ी चुनौती है। सरकार के साथ साथ युवाओं के लिए भी अपने को जल्द से जल्द रोजगार ढूंढ पाना टेढ़ी खीर है। सरकार द्वारा समय समय पर रोजगार संबंधी कई योजनाएं भी लागू की जाती रही हैं। बेरोजगार भत्ते से भी बेरोजगारी की भावना को कम करने के प्रयास किए जा रहे हैं लेकिन युवा इन्हें रोजगार का विकल्प नहीं मानते हैं। कोई इसे मात्र खोखला आश्वासन तो कोई सरकार की नीतियों को ही युवा विरोधी मान रहा है। चुनावी सरगर्मी में अब युवाओं ने इस समस्या को अपनी कसौटी का प्रमुख बिंदु बनाया है। उनका कहना है कि अब ऐसा नहीं चलेगा रोजगार के लिए अब की बार सरकार बदलेंगे और नई सरकार को इस पर स्पष्ट नीति देनी होगी।
रोजगार नीति मात्र छलावा
सरकार की नीतियां बेरोजगारी को कम करने की बजाए उसे बढ़ा रही हैं। कुछ वर्ष पूर्व राज्य सरकार द्वारा लागू की गई रोजगार नीति युवाओं के लिए मात्र छलावा है। चुनाव से पूर्व सरकार ने नीति को वापस लिया। राजनीति स्टंट कर सरकार युवाओं का आकर्षण खींचने की कोशिश की। अगर सरकार किसी ऐसी नीति को अमल में लाती जो युवाओं को बेरोजगारी के थपेड़ों से निजात दिला सके तो ही सरकार के दिन बदल सकते हैं। राहुल शर्मा, बेरोजगार युवा
सेवानिवृत्ति की उम्र में हो कटौती
सरकार की नीतियां ही सीधे तौर पर बेरोजगारी के लिए जिम्मेदार हैं। मध्यम वर्गीय परिवार इसमें सबसे अधिक पिसता जा रहा है। सरकार ने सेवानिवृत्ति की उम्र को बढ़ाकर बेराजगारी को बढ़ावा दिया। इससे ही युवाओं को नौकरी न मिलने के आसार में इजाफा हुआ है। वर्तमान में राज्य सरकार के पास ठोस रोजगार नीति नहीं हैं। जिससे युवाओं को नौकरी मिल सके। संदीप सिंह, बेरोजगार युवा
रिक्त पदों को भरे सरकार
सरकार को सरकारी विभागों में रिक्तों पदों को भरना होगा। वर्तमान में विभिन्न विभागों में सैकड़ों पद रिक्त पड़े हैं। सरकार पहले उन्हें भरे। इसके अलावा बेरोजगारी भत्ते के रूप में मिलने वाली राशी भी न के बराबर है। उसमें भी इजाफ जरूरी है। बढ़ती महंगाई में बेरोजगारी भत्ते में परिवार को गुजार करना मुमकिन नहीं है। वहीं औद्योगिक इकाईयों में भी रोजगार नीतियों का कड़ाई से पालन करने के लिए जोर देना होगा। जसबीर, बेरोजगार युवा