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बनी-रामकोट को केंद्रीय विद्यालयों की सौगात

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कठुआ। जिले के रामकोट और बनी को जल्द दो नए केंद्रीय विद्यालयों की सौगात मिलने जा रही है, जिससे दूरदराज इलाकों में सीबीएसई पाठ्यक्रम के तहत शिक्षा ग्रहण करने का विद्यार्थियों का सपना जल्द पूरा होगा। इसके लिए लगभग 20-20 कनाल भूमि की पहचान कर ली गई है। शैक्षणिक सत्र 2020-21 से कक्षाएं भी शुरू करने की तैयारी है।
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रामकोट के हालिया मंजूर हुए डिग्री कॉलेज के लिए चिह्नित भूमि से सटकर जहां केंद्रीय विद्यालय की इमारत बनाए जाने की योजना है, वहीं बनी के चांदल में केंद्रीय विद्यालय को लेकर भूमि का चयन पूरा किया गया है। जिला प्रशासन की ओर से जमीन के दस्तावेज तैयार कर शिक्षा निदेशक को भेजे जा चुके हैं। पहाड़ी इलाके के विद्यार्थियों के लिए यह बड़ा वरदान इसलिए भी होगा चूंकि इन इलाकों में अबतक सीबीएसई स्कूलों नहीं थे। प्रशासन फिलहाल इन कक्षाओं को वैकल्पिक व्यवस्था के साथ शुरू करवाएगा, जिसके लिए नजदीक के स्कूल या कॉलेजों की इमारतों का इस्तेमाल किया जा सकता है। खास बात यह भी है कि बनी का केंद्रीय विद्यालय जिले का एकमात्र विंटर जोन में उपलब्ध सीबीएसई स्कूल और केंद्रीय विद्यालय होगा। एसडीएम बनी जोगिंद्र सिंह जसरोटिया ने पुष्टि करते हुए बताया कि चांदल में जगह चिह्नित की जा चुकी है और आगामी सत्र से कक्षाएं शुरू करने का प्रयास रहेगा। इस समय देश भर में कुल 1225 केंद्रीय विद्यालय हैं, जिनमें करीब 12 लाख 92 आठ सौ के लगभग विद्यार्थी पढ़ाई कर रहे हैं। सभी केंद्रीय विद्यालयों में केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड पाठ्यक्रम चलाया जाता है।
जिले में हैं केवल तीन सेंटर स्कूल
बसोहली के एकमात्र जवाहर नवोदय विद्यालय में ही इन इलाकों में विद्यार्थियों को सीबीएसई की शिक्षा के लिए दाखिला लेना पड़ता था। जिले में इस समय कठुआ, हीरानगर और लखनपुर में तीन केंद्रीय विद्यालय चले रहे हैं। जिनमें हजारों की तादाद में क्षेत्र के विद्यार्थी शिक्षा हासिल कर रहे हैं। सीमावर्ती इलाके हीरानगर, सैन्य क्षेत्र लखनपुर और कठुआ के जंगलोट सैन्य क्षेत्र में चल रहे केंद्रीय विद्यालयों के बाद पहाड़ी इलाके के लगभग डेढ़ सौ किलोमीटर के दायरे में दो नए केंद्रीय विद्यालय खासतौर पर इलाके की बेटियों के लिए बड़ी सौगात हैं। बनी सब डिवीजन के साथ-साथ बिलावर उपजिले और बसोहली उपजिले की बेटियों को बेहतर परिणामों के बाद सीबीएसई के लिए जवाहर नवोदय विद्यालय में दाखिला लेना पड़ता था, लेकिन अब दो नए विकल्प मिलने से उन्हें लाभ मिलेगा।
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आगामी शैक्षणिक सत्र से बनी और रामकोट में केंद्रीय विद्यालय की कक्षाएं शुरू की जाएंगी। भूमि चिन्हित कर ली गई है और इमारत तैयार होने तक वैकल्पिक व्यवस्था के आधार पर कक्षाएं चलाई जाएंगी।
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-ओम प्रकाश भगत, डीसी, कठुआ
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