किसान सम्मेलन में शामिल मंचासीन पदाधिकारी। संवाद
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कठुआ। जम्मू-कश्मीर किसान तहरीक ने किसान सम्मेलन का बरनोटी में आयोजन किया। इसमें विभिन्न जिलों से आए बड़ी संख्या में किसानों ने अपनी समस्याएं उठाई। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार किसानों पर तीन नए कृषि कानून थोप रही है। सम्मेलन में पिछले कार्यकाल की समीक्षा करने के साथ भविष्य की प्राथमिकता तय की गई।
रविवार को किसान तहरीक के जिला प्रधान सेवाराम ने कहा कि ऑल इंडिया किसान सभा के साथ मिलकर उनका संगठन किसानों की समस्याओं के लिए लगातार संघर्ष कर रहा है। केंद्र सरकार की ओर से पारित तीन नए कृषि कानून किसान विरोधी हैं। जो जबरन थोपे जा रहे हैं। इसके लिए सभी को एकजुट होना पड़ेगा। इसी प्रयास के तहत इस कार्यक्रम का आयोजन किया गया है ताकि आने वाले समय में जिले के सभी किसान संगठित होकर अपनी मांगों को लेकर लेकर संघर्ष कर सकें। प्रांतीय प्रधान बनारसी दास ने कहा कि जिला में खेती योग्य भूमि की स्थितियां बहुत भिन्न है। हीरानगर सीमांत क्षेत्र की खेती योग्य भूमि काफी उपजाऊ है लेकिन वहां परिस्थितियां किसानों के अनुकूल नहीं है। इसी तरह कंडी क्षेत्र पूरी तरह से असिंचित है वहां के किसानों की समस्याएं अलग है।
पहाड़ी इलाके के किसान अलग समस्या से ग्रस्त
सम्मेलन में कठुआ शहर से सटे अंधड़ मरीन क्षेत्र में किसानों की समस्याएं पर चर्चा हुई। कहा कि पहाड़ी इलाके में खेती करने वाले किसान अलग-अलग समस्याओं से ग्रस्त है। इसके चलते सभी किसान एकजुट नहीं हो पाते हैं। बनारसी दास ने कहा कि संगठन अलग-अलग क्षेत्रों की किसानों की समस्याओं की समीक्षा करने के बाद एक मुख्य समस्या का चयन करता है। ताकि उसके लिए संघर्ष कर किसानों को इससे निजात दिलाई जा सके। पिछले 3 साल के कार्यकाल के दौरान उन्होंने फसलों की खरीद केंद्र के लिए को लेकर लगातार संघर्ष किया। जिसका परिणाम यह रहा कि इस वर्ष जिला में धान की खरीद रिकॉर्ड स्तर पर रही। इस बार भी ऐसे ही किसी मुद्दे का चयन किया जाएगा।
किसानों की हालत में नहीं हुआ सुधार: तारीगामी
मुख्य वक्ता और पूर्व विधायक यूसुफ तारीगामी ने किसानों को अपनी समस्याओं के लिए एकजुट रहने का आह्वान किया।क कहा कि आजादी के बाद से किसानों की हालत में सुधार नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि सरकार आती और जाती है। लेकिन उनका ध्यान देश के बहुसंख्यक आबादी की ओर होने के बजाय चंद पूंजीपतियों की ओर ही रहता है। इसका नतीजा यह है कि देश में आज भी मजदूर और किसान अपने हक के लिए सड़कों पर बैठे हुए हैं। जिसका ताजा उदाहरण दिल्ली में किसानों का प्रदर्शन है। लिहाजा हमें भी अपने मसलों का हल अगर चाहिए तो एकजुट होना पड़ेगा। कार्यक्रम के अंत में किसान आंदोलन के दौरान अपनी जान गंवाने वाले किसानों को श्रद्धांजलि दी गई।