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Kathua News: सत्संग में आने से मिलते हैं संत और भगवंत

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बसोहली। जंजघर में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में कथावाचक सुभाष शास्त्री ने कहा कि सत्संग में आने से संत और भगवंत दोनों की प्राप्ति होती है। उन्होंने कहा कि जहां ज्ञान का अभाव है, वहां सब कुछ होते भी कुछ नहीं।
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संत गुरु के पास ज्ञान रूपी दान होने से सबकुछ है लेकिन उसे धन को अपने पुरुषार्थ आप प्राप्त करो। एक शिष्य सेवक का बस यही कर्तव्य है कि वह अपना मन संत गुरु को समर्पित कर उनके श्रीचरणों में लगा दे। अर्थात सत्संग करे, सेवा करे, साधना करे, और सद्भाव रखते हुए सुमिरन करे। तभी सत्संग में आने का सही अर्थ में लाभ है। सुभाष शास्त्री ने कहा कि सत्संग से पाप और आज्ञा का नाश होता है। जो दिखता है वह सत्य है, अविनाशी है और जो दिखने वाला है, वह नाशवान है लेकिन रोजाना यह सुनने के बाद भी आप दिखने वाले वस्तु एवं पदार्थ की कामना ही करते हो। इससे दुख प्राप्त होते हैं, इसलिए अविनाशी के विषय में समझो और जानो और उसे गुरु के मार्ग दर्शन में पहचान कर प्राप्त कर लो। फिर किसी और चीज की अभिलाषा नहीं रहेगी। अंत में उन्होंने संगत से अनुरोध किया कि सत्संग में जरूर आएं और सत्संग में जो भी सत्य के विषय में सुनो, उस पर आचरण अवश्य करें।
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