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Kathua News: कथा में मां और पुत्र के प्रेम का वर्णन किया

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हीरानगर। करेड़ा में चल रहे श्रीमद्भागवत कथा सप्ताह का बुधवार को समापन हो गया। अंतिम दिन बड़ी संख्या में लोग कथा सुनने पहुंचे। इस दौरान कथावाचक ने मां और पुत्र के प्रेम का वर्णन किया।
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शास्त्री विजय कृष्ण प्राशर ने कथा के सातवें व अंतिम दिन भगवान श्रीकृष्ण के मथुरा आगमन, कंस वध, देवकी वसुदेव जी को कारावास से मुक्ति एवं माता देवकी एवं भगवान श्रीकृष्ण के मिलन, श्रीकृष्ण द्वारा राधा की परीक्षा, देवकी के नाम यशोदा का संदेश, यशोदा और राधा की बिरह वेदना का उद्धव प्रसंग के माध्यम से सुंदर चित्रण किया। कथा में शास्त्री विजय कृष्ण प्राशर ने पुत्र और मां के बीच के प्रेम के बारे में बताया। उन्होंने बताया किस तरह भगवान श्रीकृष्ण जब देवकी जी से मिले और देवकी के अपार प्रेम के बाद भी वह अपनी माता यशोदा को नजरअंदाज नहीं कर पाए और भगवान असमंजस में पड़ गए कि वह अपनी दोनों माताओं में से किसके प्रति समर्पित हों। कथा के अगले संदर्भ में शास्त्री विजय कृष्ण प्राशर ने गोदान के महत्व के बारे में बताया। उन्होंने बताया कि गोदान का हमारे जीवन में क्या महत्व है। प्रत्येक प्राणी को जीवन में गोदान जैसे पुण्य कार्य अवश्य करना चाहिए। समापन पर यहां आए लोगों के लिए लगाए गए भंडारे में लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया।
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