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Kathua News: हटली चाैकी के पास औचक छापा, 40 किलो मछली जब्त

Sat, 26 Apr 2025 01:03 AM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कठुआ
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प्रतिबं​धित मछली थाई मांगुर को नष्ट करती विभाग की टीम। संवाद - फोटो : kathua
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मछली पालन विभाग ने प्रतिबंधित थाई मांगुर मछली करवाई नष्ट
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कठुआ। देशभर में प्रतिबंधित थाई मांगुर मछली की जम्मू-कश्मीर में बिक्री करने का मामला सामने आया है। विभाग ने हटली चौकी के पास स्थित मछली बाजार में औचक छापा मारा और 40 किलो प्रतिबंधित मछली को जब्त किया। यह पहली बार है जब इस बाजार से थाई मांगुर मछली पकड़ी गई है। मछली पालन विभाग के सहायक निदेशक पवन पाल शर्मा ने बताया कि कार्रवाई के दौरान विक्रेता पर 3500 रुपये का जुर्माना लगाया गया और स्वास्थ्य के लिए हानिकारक मानी जाने वाली इस मछली को नष्ट कर दिया गया। विभाग ने बताया कि भारत सरकार ने थाई मांगुर मछली की बिक्री पर पहले से ही प्रतिबंध लगाया है, क्योंकि यह न केवल पर्यावरण के लिए बल्कि मानव स्वास्थ्य के लिए भी खतरनाक है। उन्होंने कहा कि विभागीय टीम को पिछले कुछ समय से इस मछली की क्षेत्र में बिक्री को लेकर इनपुट मिल रहे थे। इसके बाद शुक्रवार को औचक जांच की गई। उन्होंने बताया कि टीम ने यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया कि इस प्रकार की मछली की बिक्री पर सख्ती से रोक लगाई जाए और भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों। इसके अलावा विभाग ने अन्य विक्रेताओं को भी चेतावनी दी है कि वे इस प्रतिबंधित मछली की खरीद-फरोख्त से दूर रहें। संवाद

कार्रवाई सीमित, पिछले साल भी बड़े पैमाने पर मछलियों, अंडों और मीट के सैंपल हुए थे फेल

खाद्य सुरक्षा विभाग की कार्रवाई सीमित दायरे में ही नजर आ रही है। विभाग की ओर से की जाने वाली कार्रवाई को केवल एक सीमित दायरे में जारी है। बाकायदा फेल होने वाले या फिर जिस उत्पादक के सैंपल फेल हुए हैं उसे भी सार्वजनिक नहीं किया जा रहा है। ऐसे में घटिया गुणवत्ता का सामान बाजार में पहुंचकर खपत हो रहा है। जानकारी के अभाव में लोग संभल भी नहीं पा रहे हैं। पिछले तीन साल कानूनी कार्रवाई के बाद भी फेल हुए उत्पादों समेत घटिया उत्पाद बनाने वालों की जानकारी साझा नहीं की गई है। ऐसा तब है जबकि पिछले साल भी प्रदेश से उठाए गए मछली, अंडे, मीट और पोल्ट्री के बड़े पैमाने पर सैंपल फेल पाए गए थे।
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प्रदूषित वातावरण में पालन और पर्यावरण पर प्रभाव के चलते प्रतिबंधित

मछलीपालन विभाग ने बताया कि थाई मांगुर मछली देशभर में प्रतिबंधित है। इसे लेकर एनजीटी की ओर से भी रोक लगाई गई है। थाई मांगुर को विशेष रूप से अपशिष्ट जल और अन्य प्रदूषित स्थानों में पाला जाता है। ऐसे स्थानों में पालन से मछली में हानिकारक रसायन और बैक्टीरिया की मात्रा बढ़ जाती है, जो मानव उपभोग के लिए खतरनाक हो सकते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि इस मछली में भारी धातुएं और विषैले पदार्थ हो सकते हैं, जो स्वास्थ्य के लिए गंभीर जोखिम पैदा कर सकते हैं। इसके सेवन से पेट और आंत संबंधी समस्याएं, विषाक्तता, और अन्य स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं। कई शोधों में पाया गया है कि थाई मांगुर मछली को खाने से कैंसर होने की संभावना बढ़ जाती है। विशेषज्ञों के अनुसार थाई मांगुर मछली की एक आक्रामक प्रजाति है, जो स्थानीय जैवविविधता को नुकसान पहुंचा सकती है। यह मछली तेजी से प्रजनन करती है और अन्य प्रजातियों के लिए खाद्य और आश्रय स्रोतों को समाप्त कर सकती है, जिससे स्थानीय मछलियों की आबादी को खतरा हो सकता है। इसके अलावा, यह मछली पारिस्थितिकी तंत्र को भी प्रभावित कर सकती है, जिससे पानी की गुणवत्ता में गिरावट और स्थानीय वनस्पतियों और जीवों की संरचना में बदलाव हो सकते हैं। यह मछली तालाबों और जलाशयों में रहने वाली अन्य मछलियों और जलीय जीवों को खा जाती है, जिससे तालाब का पर्यावरण संतुलन बिगड़ जाता है।
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