संवाद न्यूज एजेंसी
कठुआ। पतंगबाजी के लिए शहर में चाइनीज डोर धड़ल्ले से बिक रही है। प्रतिबंधित होने के बावजूद इसको रोकने के लिए प्रशासन की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की गई। ऐसा तब है जबकि हर साल इससे घायल होने के मामले सामने आते रहे हैं।
दरअसल, वसंत पंचमी को लेकर डोर की डिमांड में बढ़ोतरी हुई है। सबसे अधिक मांग चाइनीज डोर की ही है। पतंग और डोर के कारोबार से जुड़े लोग वसंत पंचमी पर होने वाले कारोबार को देखते हुए चोरी-छिपे चाइनीज डोर बेचने से गुरेज नहीं कर रहे हैं। अलबत्ता चाइनीज डोर बेचने वालों ने अब डोर के बेचने का तरीका बदल लिया है। इस डोर बेचने वाले डोर को अब अपनी दुकानों पर रखने के बजाय होम डिलीवरी को माध्यम बना लिया है।
इसमें दुकान पर तो आम डोर रखी गई है, लेकिन चाइनीज डोर मांगने वाले ग्राहक को हर बार बदले हुए स्थान पर इसकी डिलीवरी की जा रही है। वहीं, कई दुकानदारों ने इसके लिए बाकायदा ऐसे लोगों को इस काम के लिए रखा है, जो दुकानदार के निर्देश का पालन करते हुए लोगों तक इसकी डिलीवरी पहुंचा रहे हैं।
चाइनीज डोर से घायल होने के साथ करंट का भी खतरा : चाइनीज डोर को बनाने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली सामग्री इस डोर को धारदार व बेहद खतरनाक बना देती है। यह इतनी खतरनाक होती है कि इसकी चपेट में आने वाला व्यक्ति न केवल गंभीर रूप से घायल हो जाता है। वहीं, हल्की सी नमी होने पर अगर यह बिजली की नंगी तारों को छू जाए तो इसमें करंट आ जाता है। यह किसी की भी मौत का कारण बन सकती है।
दोगुना दाम देकर खरीद रहे पतंगबाजी के शौकीन: बरेली और अमृतसर में पतंगबाजी के लिए बनाई जाने वाली पारंपरिक डोर शहर में 250 से 500 रुपये प्रति रील के हिसाब से बिक रही है। लुधियाना और दिल्ली जैसे बड़े शहरों से आने वाली चाइनीज डोर 1000 से 1500 रुपये में उपलब्ध हो रही है। महंगी होने के बावजूद इसकी मजबूती के कारण पतंगबाजाें की यह पहली पसंद बन चुकी है। ऐसे में इसकी बिक्री भी तेज होती जा रही है।