संवाद न्यूज एजेंसी
कठुआ। पांच दिवसीय बैंकिंग व्यवस्था लागू करने, वेतन संशोधन जल्द करने, प्रदर्शन आधारित प्रोत्साहन में समानता लाने और सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के प्रस्तावित निजीकरण का विरोध समेत विभिन्न मांगों को लेकर शुक्रवार को राष्ट्रीयकृत बैंकों के कर्मचारियों ने एक दिवसीय कलमबंद हड़ताल की। इसके तहत भारतीय स्टेट बैंक समेत विभिन्न बैंकों के कर्मचारियों ने कामकाज से दूरी बनाकर प्रदर्शन किया और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की।
भारतीय स्टेट बैंक की शाखा के बाहर यूनियन नेता नरेंद्र सिंह के नेतृत्व में कर्मचारियों ने जोरदार नारेबाजी करते हुए पांच दिवसीय बैंकिंग व्यवस्था लागू करने और लंबित वेतन संशोधन जल्द करने की मांग उठाई। प्रदर्शनकारियों ने सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के निजीकरण के प्रस्ताव का भी विरोध किया। यूनियन नेता नरेंद्र सिंह ने कहा कि पांच दिवसीय बैंकिंग की मांग लंबे समय से लंबित है। भारतीय रिजर्व बैंक, भारतीय जीवन बीमा निगम और भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड जैसे वित्तीय संस्थानों में पांच दिवसीय कार्य व्यवस्था लागू है।
यह सुविधा अब तक बैंक कर्मचारियों को नहीं मिली है। उन्होंने कहा कि सभी शनिवार अवकाश घोषित किए जाने की स्थिति में कार्य अवधि में आवश्यक समायोजन कर ग्राहकों को बेहतर सेवाएं दी जा सकती हैं। कर्मचारियों ने प्रदर्शन आधारित प्रोत्साहन योजना में कथित असमानता का मुद्दा भी उठाया। उनका कहना था कि निचले स्तर के कर्मचारियों को सीमित प्रोत्साहन राशि मिलती है, जबकि उच्च अधिकारियों को कई गुना अधिक लाभ मिलता है। उन्होंने प्रोत्साहन राशि के वितरण में समानता की मांग की। प्रदर्शनकारियों ने बैंकों में कर्मचारियों की कमी का मुद्दा उठाते हुए कहा कि सीमित स्टाफ के बावजूद कर्मचारी कई-कई जिम्मेदारियां संभाल रहे हैं।
उन्होंने पुरानी पेंशन योजना लागू करने की मांग भी दोहराई और कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक कर्मचारियों के हितों की अनदेखी नहीं की जानी चाहिए। यूनियन के अनुसार मांगों को लेकर आगामी 28, 29 और 30 सितंबर को तीन दिवसीय हड़ताल प्रस्तावित है। इसके बाद भी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं हुआ तो 26 अक्तूबर के बाद अनिश्चितकालीन हड़ताल का रास्ता अपनाया जाएगा।