जान जोखिम में डालकर सेवा दरिया को पार करते विद्यार्थी। संवाद
बनी। 300 से अधिक आबादी वाले घट और घत्थ गांवों के लोगाें को पक्का पुल नसीब नहीं हो पाया है। स्कूली बच्चे सेवा नदी को रस्सी झूले से पार करते हैं। नदी उफान पर होने से यह रस्सी मौत से सीधी जंग जैसा बन गया है।
ग्रामीणों ने कई बार प्रशासन व जनप्रतिनिधियों से पुल बनाने की मांग की, लेकिन आज तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। क्षेत्र की स्थिति आज भी पुराने जमाने की तरह बनी हुई है जहां लोग जान हथेली पर रखकर दरिया पार करते हैं। संवाद
हम रोज रस्सी से नदी पार करते हैं। कई बार लगता है कि कहीं हाथ छूट गया तो जान नहीं बचेगी। मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से हाथ अपील करता हूं कि हमारे गांव के लिए एक पक्का पुल बनवाएं।
-छात्र विशाल
सरकार बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ की बात करती है, और हम रोज इस दरिया को पार करते हैं और हर बार लगता है कि कुछ अनहोनी न हो जाए। सरकार को यहां पक्का पुल बनाना चाहिए।
-छात्रा ममता देवी
कोई नया मुद्दा नहीं है। अब तक इस रस्सी से गुजरते हुए आधा दर्जन से ज्यादा हादसे हो चुके हैं। किसी की टांग टूटी, किसी का हाथ और बाजू। कई बार लोग नदी में गिर गए। फिर भी प्रशासन की नींद नहीं टूटी। यहां से दरिया पार करना एक खतरनाक जोखिम है।
-कुलदीप कुमार, स्थानीय निवासी