आए दिन होने वाले सड़क हादसों में पिछले कुछ दिनों में ही कई लोग घायल हो चुके हैं। इनमें से चार की तो जान भी चली गई।
हाईवे के साथ लिंक मार्गों और ग्रामीण सड़कों पर भी आए दिन होने वाले हादसों की मुख्य वजह सड़कों की खस्ताहालत है। वाहन चालकों की लापरवाही और ओवरलोडिंग भी एक वजह है।
शहरी सड़कों पर जहां वाहनों का रेला जाम की वजह बनता है, तो हाईवे पर बने गड्ढे हादसों को दावत देते रहते हैं। इन वजहाें से सड़क हादसों में मरने वालों की संख्या इस वर्ष पिछले वर्ष के मुकाबले अधिक रही है।
पिछले साल जिला अस्पताल से रेफर किए गए मामलों में दो की मौत हुई थी। लेकिन वर्ष 2015-16 में मरने वालों की संख्या दर्जन भर के करीब है। दिसंबर महीने में जहां सड़क हादसों में दो लोगों की मौत हुई थी, तो जनवरी में तीन लोगों की मौत हुई। वहीं फरवरी महीने में अब तक पांच लोगों की मौत हो गई है।
फरवरी महीने में मरने वालों में एक बच्चा भी शामिल है। ऐसे में पिछले दो वर्ष में जहां एक हजार से ज्यादा लोग घायल हुए, तो दो साल में मरने वालों की संख्या एक दर्जन के करीब है।
जिला अस्पताल में पिछले दो वर्ष में ही पौने दो हजार लोग विभिन्न सड़क हादसों में घायल होने के बाद भर्ती करवाए गए। पिछले साल जहां प्रति महीने 85 लोग घायल हुए, तो इस वर्ष अब तक औसतन 63 लोग हर महीने सड़क हादसों में घायल होकर अस्पताल में पहुंचाए जाते रहे हैं।
वर्ष 2014 में जहां अधिकतम 116 लोग सड़क हादसों में घायल हुए, तो इस वर्ष भी 115 लोग सड़क हादसे के शिकार बने।
ऐसे में सवाल यह है कि क्या सड़कों का जाल भी वाहनों की संख्या में कमी नहीं जा पाया या फिर चालकों की लापरवाही ही एक मात्र कारण है। बहरहाल सड़क हादसों की हर महीने की संख्या ने स्थिति को चिंता का विषय बना दिया है।