पित्त और रक्तदोष के विकारों से मिलेगी छुटकारा
संवाद न्यूज एजेंसी
कठुआ। राजकीय मेडिकल कॉलेज (जीएमसी) कठुआ के सहायक अस्पताल में आयुष विभाग ने सिरावेध कर्म चिकित्सा प्रक्रिया शुरू की है। यह आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति विशेष रूप से पित्त और रक्तदोष से संबंधित विकारों के उपचार के लिए प्रभावी मानी जाती है।
सिरावेध कर्म को रक्तमोक्षण भी कहा जाता है। यह एक पारंपरिक आयुर्वेदिक चिकित्सा प्रक्रिया है, जिसमें शिराओं (नसों) में छेद करके रक्त निकाला जाता है। इस प्रक्रिया के माध्यम से शरीर में मौजूद विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने में मदद मिलती है, जिससे कई प्रकार के रोगों से राहत मिलती है।
आयुष विभाग के चिकित्सा अधिकारी डॉ. दीपक शर्मा ने बताया कि इस चिकित्सा पद्धति को मरीजों की सुविधा के लिए शुरू किया गया है। सिरावेध कर्म से सोरायसिस, एक्जिमा, एलर्जी, माइग्रेन और अन्य रक्त विकारों के उपचार में मदद मिलेगी। उन्होंने बताया कि इस चिकित्सा प्रक्रिया के तहत रोगियों को शरीर से विषाक्त पदार्थों को निकालने, रक्त संचार को सुधारने और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में सहायता मिलेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यह विधि पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों के साथ मिलकर रोगियों को दीर्घकालिक लाभ प्रदान कर सकती है।