शहर के व्यस्त इलाकों में आग से निपटने की तैयारी आधी-अधूरी है। मुख्य बाजार और उससे सटे इलाकों में तो हालात और भी संवेदनशील हैं।
तंगहाल गलियों के बीच एक दूसरे से सटी दुकानें और आवासीय इलाकों में यदि आग लगने की दुर्घटना हो तो उससे निपटने के लिए सरकारी मशीनरी असहाय है। दरअसल इसकी वजह शहर में हाईड्रेंट सुविधा का नहीं होना है।
शहरी इलाकों में अनिवार्य रूप से ऐसे इलाकों का चयन किया जाता है जहां पर फायर टेंडर का पहुंच पाना मुमकिन न हो। इन इलाकों में तेज प्रेशर के साथ पानी उपलब्ध करवाने के लिए हाईड्रेंट बनाए जाते हैं।
फायर एंड इमरजेंसी विभाग पानी के लिए इन्हीं हाईड्रेंट पर निर्भर होता है। हैरत की बात है कि कठुआ शहर के व्यस्त और व्यापारिक केंद्रों वाले इलाकों में एक भी हाईड्रेंट चलने की स्थिति में उपलब्ध नहीं है।
ऐसे में यदि आग लगने की दुर्घटना होती है तो भीतरी इलाकों तक फायर टेंडर का पहुंच पाना मुमकिन नहीं होता। नतीजतन आग बुझाने के लिए लोग अपने स्तर पर ही कुछ करने को मजबूर होते हैं।
फायर एंड इमरजेंसी विभाग के सांबा कठुआ सहायक निदेशक जमीत सिंह भाऊ के अनुसार कठुआ शहर का बाजार संकरा और बेहद लंबा है।
सैकड़ों की संख्या में व्यापारिक प्रतिष्ठान और दुकानें हैं लेकिन हाईड्रेंट की सुविधा कहीं पर भी उपलब्ध नहीं है। यदि आग लगने की दुर्घटना होती है तो विभाग को फायर टेंडर के आगे पाइप लगाकर पानी पहुंचाने का ही विकल्प मौजूद है।
उन्होंने कहा कि पाइप से पानी को सीमित दूरी तक ही प्रेशर के साथ पहुंचाया जा सकता है जबकि कठुआ के मुख्य बाजार में अधिकतर स्थानों में विभाग भी असहाय है।
उन्होंने बताया कि हाईड्रेंट एक ऐसा प्वाइंट होता है जहां पर चौबीसो घंटे तेज प्रेशर के साथ पानी उपलब्ध रहता है। इस बाबत नए सिरे से मांग उठाई जाएगी।