कठुआ। जम्मू-कश्मीर में औद्योगिक विकास को गति देने के लिए शुरू किया गया सब्सिडी पैकेज समाप्त होने के बाद औद्योगिक विकास की रफ्तार थम गई है। जम्मू कश्मीर के स्वर्णिम भविष्य को बनाने के लिए शुरू की गई इस पहल में केंद्र सरकार की बेरुखी ने निवेशकों को भी हतोत्साहित किया है। जम्मू-कश्मीर को प्रदेश से राज्य का दर्जा मिलने में जितना इंतजार करना पड़ रहा है उतना ही इंतजार निवेशकों को केंद्र के पैकेज का करना पड़ रहा है।
30 सितंबर 2024 को पैकेज की अवधि समाप्त होने के बाद से अब तक औद्योगिक हब बनाए जा रहे कठुआ जिले में केवल एक दर्जन के आसपास नई औद्योगिक इकाइयों के प्रस्ताव सामने आए हैं, जो चिंता का विषय है। सरकारी और निजी मिलाकर कुल 477 औद्योगिक इकाइयां अनंतिम पंजीकृत की गई हैं। इनमें से केवल 172 इकाइयां ही उत्पादन की स्थिति में हैं। सरकारी जमीन पर 249 इकाइयों को अलॉटमेंट मिला है, जबकि निजी जमीनों पर लगभग 300 इकाइयां अब भी पैकेज की प्रतीक्षा में हैं। इन इकाइयों के प्रतिनिधि उपराज्यपाल से मुलाकात भी कर चुके हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकल पाया है।
विदेशी निवेश का अभाव, मुरलीधरण ने यूनिट सरेंडर किया
प्रदेश में विदेशी निवेश के बड़े डंके के बीच कठुआ जिले में औद्योगिक निवेश के क्षेत्र में फिलहाल कोई विदेशी निवेश दर्ज नहीं हुआ है। उल्लेखनीय है कि क्रिकेटर मुथैया मुरलीधरण को अलॉट की गई यूनिट भी उन्होंने सरेंडर कर दी है, क्योंकि वह सब्सिडी पैकेज में पंजीकरण नहीं कर पाए।
कठुआ जिले में औद्योगिक विकास को लेकर बनाई गई योजनाओं को उस समय झटका लगा जब श्रीलंकाई क्रिकेटर मुथैया मुरलीधरन ने अपनी प्रस्तावित औद्योगिक इकाई को सरेंडर कर दिया। उन्हें जम्मू-कश्मीर सरकार द्वारा 206 कनाल जमीन एल्यूमिनियम कैन निर्माण और बॉटलिंग प्लांट के लिए आवंटित की गई थी। यह परियोजना 1600 करोड़ रुपये के निवेश के साथ शुरू की जानी थी, लेकिन औद्योगिक सब्सिडी पैकेज में पंजीकरण न हो पाने के कारण मुरलीधरन ने यूनिट को वापस कर दिया।
इस जमीन की लीज डीड 14 जून 2024 को निष्पादित की गई थी, और इसे 8 लाख प्रति कनाल की दर से आवंटित किया गया था। इसके अतिरिक्त, 60,000 वार्षिक लीज शुल्क भी निर्धारित किया गया था। हालांकि, इस आवंटन को लेकर राजनीतिक विवाद भी सामने आया, जिसमें कुछ नेताओं ने आरोप लगाया कि जमीन “मुफ्त” दी गई थी। सरकार ने स्पष्ट किया कि यह प्रक्रिया जम्मू-कश्मीर औद्योगिक भूमि आवंटन नीति 2021–30 के तहत पूरी पारदर्शिता के साथ की गई थी। मुरलीधरन की इकाई का सरेंडर इस बात की ओर इशारा करता है कि बाहरी निवेशकों के लिए जम्मू-कश्मीर में नीतिगत स्पष्टता और स्थायित्व की आवश्यकता है।
बड़े निवेशक जिन्होंने लाभ उठाया
कुछ बड़े उद्योगों ने सब्सिडी पैकेज का लाभ उठाते हुए भारी निवेश किया है
उद्योग का नाम अनुमानित निवेश राशि
जूपिटर एल्यूमिनियम 1400 करोड़
चिरीपाल पॉलीफिल्म 1250 करोड़
कांधारी बेवरेजिज कोका कोला 1400 करोड़ (लगभग)
क्रीमबेल 350 करोड़
जमीन आबंटित लेकिन नहीं शुरू हुआ काम, पैकेज का इंतजार
वहीं कुछ बड़े उद्योगों को जमीन अलॉट तो हुई, लेकिन वे पैकेज में पंजीकरण नहीं कर पाए। जम्मू-कश्मीर में नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए, सौर ऊर्जा कंपनी ग्रू एनर्जी ने जम्मू-कश्मीर के कठुआ जिले में 3.2 गीगावाट (जीडब्ल्यू) सौर मॉड्यूल विनिर्माण सुविधा स्थापित करने के लिए 4500 करोड़ रुपये का भारी निवेश करने की योजना की घोषणा की थी। बाकायदा इसका नींव पत्थर उपराज्यपाल ने किया लेकिन प्राप्त जानकारी के अनुसार ग्रियू एनर्जी ने नींव पत्थर रखा, लेकिन काम शुरू नहीं हुआ । चूंकि वे सब्सिडी पैकेज का लाभ नहीं ले पाए। इसी तरह से आएसडब्लूएम (भिलवाड़ा ग्रुप) को अलॉट की जमीन अब भी खाली हल्दीराम ग्रुप को जमीन आबंटन के बाद को पैकेज नहीं मिल पाया। एडवांस पॉलीफिल्म्स की स्थिति भी ऐसी ही है।
छोटे उद्योगों को सीमित राहत
पैकेज का लाभ उठाने वाले छोटे उद्योगों की संख्या 80 है, जिनमें फार्मा और पैकेजिंग सेक्टर की इकाइयां प्रमुख हैं। हालांकि, निजी जमीनों पर स्थापित होने वाली अधिकांश इकाइयां अब भी अनिश्चितता की स्थिति में हैं। औद्योगिक नीति में स्पष्टता की कमी और सब्सिडी पैकेज की समाप्ति के बाद निवेशकों में असमंजस की स्थिति बनी हुई है। कई उद्यमियों का कहना है कि यदि सरकार जल्द कोई नया प्रोत्साहन पैकेज नहीं लाती, तो जम्मू-कश्मीर में औद्योगिक विकास की गति और धीमी हो सकती है।