साहिल खजूरिया
कठुआ। वो दिन दूर नहीं, जब बसोहली की रंजीत सागर झील में क्रूज दौड़ते नजर आएंगे। अंतर्देशीय जलमार्ग को लेकर नौ साल से फाइलों के भीतर चल रही गतिविधियां जल्द जमीनी स्तर पर दिखना शुरू हो जाएंगी। अटल सेतु के जरिए सड़क मार्ग से जुड़े हिमाचल, पंजाब और जम्मू-कश्मीर को अब जलमार्ग से जोड़ने की कवायद शुरू हो गई है।
अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण द्वारा रावी दरिया को राष्ट्रीय जलमार्ग 84 घोषित कर भारतीय राजपत्र में भी शामिल किया गया है। एनएचपीसी संचालित सेवा चरण दो जलविद्युत परियोजना से सटे गंडियार से शुरू होकर यह जलमार्ग रंजीत सागर बांध तक प्रस्तावित है। रावी में अंतर्देशीय जल परिवहन की संभावनाएं कठुआ समेत आसपास के क्षेत्र में समृद्धि के द्वार खोलेंगी।
लगभग 44 किलोमीटर के इस जलमार्ग में पर्यटन के साथ-साथ जलमार्गों की टैपिंग, अंतर्राज्यीय कनेक्टिविटी, मछली पालन की संभावनाओं, जलमार्ग से सटे और सड़क मार्ग से दूर इलाकों को सीधे तौर पर जोड़ने सहित माल ढुलाई और यात्रियों को विभिन्न इलाकों तक पहुंचाने की संभावनाएं तलाशी जा रही हैं।
खास बात यह है कि इस अंतरराज्यीय जलमार्ग के जरिये बनी के सरथल, हिमाचल के चंबा, डलहौजी और भद्रवाह को जाने वाले पर्यटकों को भी आकर्षित किया जा सकेगा। रावी दरिया के जलमार्ग से कम समय में अंतरराज्यीय परिवहन, रोजाना होने वाली फल-सब्जियों, डेयरी, मछलियों, सरकारी राशन, भवन निर्माण सामग्री की दूरदराज इलाकों तक ढुलाई, कार्गो में भी मदद मिलेगी।
सौ से अधिक गांव को जोड़ेगा रावी अंतर्देशीय जलमार्ग
अंतरराष्ट्रीय कला नगरी बसोहली को एक बार फिर बड़े पैमाने पर विकसित करने की कवायद जारी है। बसोहली के पश्मीना शॉल हों या फिर नायाब चित्रकारी, ऐतिहासिक धरोहरें हों या फिर हाल में विकसित अटल सेतु, यह एक बार फिर लोगों की जुबान पर होंगे। पूर्व में किए गए सर्वेक्षण पर गौर करें, तो सतवाईं से हट्ट माश्का तक प्रस्तावित इस जलमार्ग की कुल लंबाई 34 किलोमीटर है, जबकि तीन किलोमीटर की चौड़ाई वाली यह झील 87 वर्ग किलोमीटर में फैली है। इस जलमार्ग से झील के दोनों ओर बसे पंजाब, हिमाचल और जम्मू-कश्मीर के लगभग सौ से अधिक गांव की एक लाख से अधिक आबादी के सीधे तौर पर लाभान्वित होने की बात सामने आई है।
कठुआ जिले में 14 जेट्टी प्वाइंट बनेंगे
सर्वेक्षण के आधार पर दरिया की दाहिनी ओर 14 जेट्टी प्वाइंट बनाए जाने की योजना शामिल थी। इसमें कठुआ के हट्ट माश्का, सलोवा, सांधर, प्रोंगल, मांडला, बसोहली, टीआरसी पलाही, पुरथू, पनागर, थाना, सवार, कोवा, अंबुघाट और सतवाईं शामिल हैं। वहीं बाईं ओर हिमाचल के चूहन और खैरी, पंजाब के दरबान, सर्ती, फंगोटा, नलोह और उच्चा थड़ा के सात जेट्टी प्वाइंट शामिल हैं। सर्वेक्षण में छह क्रिस क्रॉस जंक्शन की पहचान की गई है।
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शाहपुर कंडी झील से भी जलमार्ग की बढ़ी उम्मीदें
अंतर्देशीय जलमार्ग को लेकर पूर्व में हुए सर्व के बाद बसोहली विधानसभा क्षेत्र में तैयार हो रही दूसरी बड़ी शाहपुर कंडी झील भी पर्यटन से लेकर जलमार्ग के नए आयाम खोलने का काम करने वाली है। यह झील न सिर्फ लखनपुर से सटे जम्मू कश्मीर के हिस्से में जलमार्ग का नया जरिया बन सकती है बल्कि पंजाब और जम्मू कश्मीर के बीच व्यापार का एक नया मार्ग भी खोलने की क्षमता रखती है। शाहपुर कंडी बांध पर झील को भरने का काम जारी है।
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जलमार्ग को लेकर नौ साल पहले शुरू हुई प्रक्रिया अब परवान चढ़ने जा रही है। इससे बसोहली से सटे इलाकों में भी विकास के नए द्वार खुलेंगे। जलमार्ग माल ढुलाई का सस्ता और बेहतर जरिया भी बनेगा। रंजीत सागर झील के अलावा शाहपुर कंडी झील को भी बेहतर जलमार्ग के रूप में विकसित किया जा सकता है।
- ठाकुर दर्शन सिंह, विधायक, बसोहली