आम और लीची की फसल के अलावा कुछ जगह ट्रांसफार्मरों को पहुंचा नुकसान
संवाद न्यूज एजेंसी
कठुआ। शुक्रवार शाम जिले के कई इलाकों में आए आंधी तूफान ने बिजली ढांचे को भारी नुकसान पहुंचाया है। हीरानगर कठुआ के इलाकों में सबसे ज्यादा नुकसान दर्ज किया गया है, जहां पेड़ और टहनियां गिरने से कई खंभे गिर गए हैं। वहीं बिजली के तार टूट गए हैं। नुकसान का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 24 घंटे बीतने के बाद भी शनिवार शाम तक कठुआ के दस फीडरों पर बिजली बहाल नहीं हो पाई थी। कुछ फीडर आंशिक रूप से चल रहे हैं।
कठुआ ग्रिड से चनग्रां को जोड़ने वाली 66केवी लाइन सबसे ज्यादा प्रभावित हुई है। इसे देर रात तीन बजे के लगभग बहाल कर दिया गया। हालांकि इसके अधीन आने वाले इलाकों में 11 केवी लाइन और स्थानीय स्तर पर फॉल्ट को दुरूस्त कर बिजली बहाल करने में शनिवार दोपहर तक का समय लग गया। इसी तरह से रामकोट छलां लाइन दोपहर डेढ़ बजे, जखोल बाख्ता लाइन दोपहर बारह बजकर चालीस मिनट तक, घाटी बाख्ता लाइन भी दोपहर बारह बजकर चालीस मिनट पर बहाल हो सकी है। 66केवी लाइन के खंभे भी कई जगह टेड़े हो गए, जिन्हें क्रेन की मदद से सीधा करवाकर फिलहाल बिजली बहाल कर दी गई है।
बिजली विभाग के कार्यकारी अभियंता सुरेंद्र कुमार ने बताया कि जिले के हीरानगर और कठुआ के इलाकों में सबसे ज्यादा नुकसान दर्ज किया गया है। कई जगह तो एक साथ आधा दर्जन तक खंभे भी टूटे पेड़ों की चपेट में आ गए। कुछ जगह ट्रांसफार्मरों को भी नुकसान पहुंचा है। अधिकांश हिस्सों में युद्धस्तर पर बिजली बहाल करने का काम जारी है, लेकिन अब भी दस फीडरों पर बिजली बहाली का काम जारी है। उम्मीद है कि शनिवार रात तक इनमें भी बिजली बहाल कर दी जाएगी। नुकसान के आकलन के लिए सहायक कार्यकारी अभियंताओं से रिपोर्ट मागी गई है।
.मैदानी इलाकों में आम और लीची की फसल को भारी नुकसान की जानकारी सामने आ रही है। अंदड और कंडी के इलाकों में फलदार पौधों को नुकसान पहुंचा है। कई इलाकों में पेड़ों से आम गिर गए हैं। वहीं लीची के फल भी गिर गए हैं। टहनियां टूटने से काफी नुकसान हुआ है। मुख्य बागवानी अधिकारी सुशील अंगुराना ने बताया कि नुकसान के आकलन के लिए संबंधित क्षेत्रों के एचडीओ को निर्देश जारी किए गए हैं।
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नुकसान का आकलन करने के लिए दिए हैं निर्देश
आंधी तूफान से जिले में जानमाल का कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ है। आंशिक रूप से हुए नुकसान का आकलन करने के लिए टीमों को निर्देश दिए गए हैं।
- डॉ. राकेश मिन्हास, डीसी, कठुआ