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Kathua News: 12 साल पुराने एनडीपीएस के मामले में आरोपी बरी

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संवाद न्यूज एजेंसी
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कठुआ। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ने एनडीपीएस के 12 साल पुराने मामले में आरोपी को बरी कर दिया है। आदेश के अनुसार, अभियोजन पक्ष आरोपी को दोषी साबित करने में विफल रहा और जांच में कई गंभीर खामियां पाई गई हैं।
अदालत ने अपने फैसले में कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपी से बरामद माल की सुरक्षित कस्टडी और उसकी पहचान साबित नहीं कर पाया है। जांच में मौजूद खामियों के कारण नमूनों से छेड़छाड़ की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। इसलिए आरोपी के खिलाफ आरोप संदेह से परे सिद्ध नहीं हुए। लिहाजा आरोपी को बरी करने का फैसला सुनाया जाता है।
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मामले की सुनवाई अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश प्रवीन पंडोह की अदालत में की गई। कोर्ट में दायर चालान के अनुसार, कठुआ पुलिस ने नगरी अड्डा के पास मोटरसाइकिल सवार के कब्जे से 400 पैरावोन स्पास कैप्सूल और 11 बोतल कोरेक्स बरामद करने का दावा किया था।
पुलिस ने आरोपी इरफान यासीन निवासी वार्ड -2 कठुआ के खिलाफ एनडीपीएस के तहत मामला दर्ज कर चालान को 29 अक्टूबर 2015 को कोर्ट में प्रस्तुत किया। आरोपी के खिलाफ 26 दिसंबर 2015 को आरोप तय किए गए थे। इसमें उसने खुद को निर्दोष बताया। इसके बाद, अदालत ने अभियोजन पक्ष को मामले में साक्ष्य पेश करने के निर्देश दिए थे।
अभियोजन पक्ष की ओर से 11 गवाह कोर्ट में पेश हुए। सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि अभियोजन पक्ष यह साबित नहीं कर पाया कि अदालत में पेश की गई सामग्री वही थी, जो मौके पर आरोपी से बरामद की गई थी। गवाहों ने बताया कि जब्त की गई कोरेक्स की बोतलों पर लेबल लगे हुए थे, लेकिन अदालत में पेश बोतलों पर कोई लेबल नहीं था।
इसके अलावा, जब्ती दस्तावेजों में समय और कैप्सूलों की संख्या को लेकर कटिंग और ओवरराइटिंग भी पाई गई। अदालत ने इसे मामले की विश्वसनीयता पर गंभीर प्रश्न चिह्न माना। कोर्ट ने कहा कि जांच अधिकारी ने मौके पर सीएफएसएल फॉर्म नहीं भरा, जबकि एनडीपीएस मामलों में यह एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया मानी जाती है। अदालत ने कहा कि इससे जब्त नमूनों की विश्वसनीयता पर संदेह उत्पन्न होता है।
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इसके साथ ही कोर्ट ने पाया कि घटना स्थल सार्वजनिक स्थान था और वहां लोगों की आवाजाही थी, लेकिन पुलिस ने किसी स्वतंत्र नागरिक को गवाह नहीं बनाया। अदालत ने इसे भी अभियोजन पक्ष की कमजोरी माना। इन सभी कमियों को देखते हुए कोर्ट ने आरोपी को संदेह का लाभ देते हुए बरी करने का फैसला सुनाया।
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