कठुआ। कैलाश कुंड यात्रा 20 और 21 अगस्त को भद्रवाह के पारंपरिक रूट से ही चलेगी। छत्रगलां रूट से न तो यात्रा की जा सकेगी और न ही लंगर लगाए जा सकेंगे। खराब मौसम को देखते हुए पारंपरिक छड़ी यात्रा ही होगी जिसमें सीमित संख्या में श्रद्धालु शामिल होंगे।
कैलाश कुंड यात्रा में हर साल करीब 20 हजार श्रद्धालु डोडा जिले से शामिल होते रहे हैं। इस साल डोडा जिले से यात्रियों की संख्या सीमित कर 200 कर दी गई है। उधमपुर जिले से 100 और कठुआ जिले से 50 श्रद्धालुओं के यात्रा में शामिल होने की अनुमति दी जाएगी। यात्रा को लेकर सुरक्षा के भी पुख्ता इंतजाम सुनिश्चित किए गए हैं। डीसी डोडा हरविंद्र सिंह ने बताया कि तीन अलग-अलग जगह से यात्रा कैलाश कुंड जाती है। भद्रवाह की ओर से इस बार पारंपरिक रूट से ही यात्रा को अनुमति दी गई है। 20 को यात्रा भद्रवाह से चलेगी और रात्रि पड़ाव के बाद 21 की सुबह कैलाश सरोवर में अनुष्ठान और स्नान के बाद लौट आएगी। एसडीएम बनी संदीप कुमार ने बताया कि छत्रगलां रूट पर छत्रगलां और छत्री टॉप पर दो लंगर लगाने के लिए आयोजकों ने अनुमति मांगी थी। खराब मौसम को देखते हुए इसकी इजाजत नहीं दी गई।