कठुआ/हीरानगर/बसोहली/बनी। नवरात्र को लेकर तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। जिले भर के मंदिरों को दुल्हन की तरह सजा दिया गया है। कहीं रंग बिरंगी चुनरियां तो कहीं रंग बिरंगे फूल मां के भवनों की शोभा को बढ़ाते नजर आ रहे हैं। आज से शुरू होने वाले नवरात्रि पर्व को लेकर प्रशासन ने भी अपनी तैयारियों को अंतिम रूप दे दिया है। शहर के विभिन्न मंदिरों से निकाली जाने वाली प्रभात फेरियों का दौर भी आज से शुरू हो जाएगा। हर साल चैत्र नवरात्र में जिले के मंदिरों में श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ता है। माता बाला सुंदरी नगरी, महाकाली मंदिर जसरोटा, माता आशापूर्णी मंदिर, किले वाली माता लखनपुर, किले वाली माता हीरानगर, बसोहली में चंचलो माता मंदिर, चामुंडा माता मंदिर समेत बनी के जोडेयां माता मंदिर, शक्ति माता मंदिर में भी श्रद्धालुओं के भारी संख्या में उमड़ने का अंदाजा है। ऐसे में मंदिर कमेटियों ने जिला प्रशासन के सहयोग से बिजली, पानी, स्वास्थ्य आदि सुविधाओं को सुनिश्चित कर लिया है। रविवार होने के चलते पहले नवरात्र पर श्रद्धालुओं की संख्या में भारी इजाफा रहने की उम्मीद है।
मंदिरों में लगने वाले मेले भी श्रद्धालुओं को खास तौर पर आकर्षित करते हैं। बच्चों के लिए जहां खरीदारी का मौका रहता है। तरह-तरह के पारंपरिक पकवानों की बिक्री भी जोरों पर होती है। प्रशासन ने इन मेलों की सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए पुलिस की भी तैनाती सुनिश्चित की है। जोडेयां माता के दरबार पर श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए मंदिर कमेटी बांझल इस बार लंगर की व्यवस्था करने जा रही है। सामान की ढुलाई का काम भी कुछ दिन पहले से ही शुरू हो चुुका है। बनी के शक्ति माता मंदिर में श्रद्धालुओं की अच्छी खासी भीड़ रहती है। जसरोटा महाकाली मंदिर में पहले नवरात्र पर परंपरा अनुसार ध्वजारोहण किया जाएगा, जिसके बाद लंगर की सुविधा भी श्रद्धालुओं के लिए उपलब्ध रहेगी।
हट्ट और धार महानपुर में आज से सजेगा अयोध्या दरबार
बसोहली। मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के आदर्शों को जन-जन तक पहुंचाने के लिए शारदीय नवरात्र में तो हर जगह रामलीला का मंचन किया जाता है, लेकिन बसोहली के कई पहाड़ी इलाके ऐसे हैं, जहां चैत्र नवरात्र में रामलीला मंचन के लिए अयोध्या दरबार सजाया जाता है। धार महानपुर और हट्ट गांव में इन दिनों की रामलीला को देखने के लिए बड़ी संख्या में आसपास के गांव से लोग पहुंचते हैं। लगभग तीन दशक पुरानी परंपरा को निभाने के लिए कलाकारों का उत्साह भी देखते ही बनता है। धार महानपुर में तिरपाल और शहतीर से बने मंच पर इसका मंचन होता रहा जो अब पक्के मंच में बदल चुका है। पचास से अधिक कलाकार विभिन्न पात्र निभाते हैं। इसके साथ वो अपनी परंपरा और धर्म को बढ़ावा देने के साथ ही आस्था भी मानते हैं। शारदीय नवरात्र से इत्र चैत्र नवरात्र की यह रामलीला नौ दिन तक सीमित न होकर कई दिन अधिक तक जारी रहती है। इन दिनों में पहाड़ों में अक्सर मौसम खराब रहता है जिसकी वजह से मंचन को अगले दिन के लिए टाल दिया जाता है। लेकिन जोश कम नहीं होता। ब्यूरो