पहाड़ी क्षेत्रों के बसोहली, बनी और बिलावर में 12 विशेषज्ञ पदों में से 16 खाली
कठुआ। प्रदेश में सरकार बनने के छह महीने बाद भी स्वास्थ्य सुविधाओं में कोई सुधार नहीं हुआ है। जिले के सभी पांच सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी) के अलावा एक ट्रॉमा सेंटर और जच्चा-बच्चा अस्पताल के 70% विशेषज्ञ डॉक्टरों के पद खाली पड़े हैं।
स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार, जिले के अस्पतालों में कुल 32 विशेषज्ञ पद स्वीकृत हैं, जिनमें से केवल 11 भरे हुए हैं। वहीं, 160 चिकित्सा अधिकारियों के पदों में से 110 रिक्त हैं।
विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी से पहाड़ी इलाकों के तीन सीएचसी—बसोहली, बनी और बिलावर सबसे अधिक प्रभावित हैं। स्थानीय लोगों को छोटी-मोटी बीमारियों के लिए भी जीएमसी कठुआ या जम्मू जाना पड़ता है, जिससे उनका समय और पैसा दोनों बर्बाद हो रहा है।
बसोहली सीएचसी में पांचों विशेषज्ञ पद खाली हैं, जबकि बनी में एक फिजिशियन के अलावा चार पद रिक्त हैं। बिलावर में छह में से तीन विशेषज्ञ उपलब्ध हैं। ट्रॉमा सेंटर महानपुर में 10 में से आठ पद खाली हैं, और महात्मा गांधी जच्चा-बच्चा अस्पताल में एक भी डॉक्टर नहीं है। संवाद
अधिकांश पीएचसी बिना डॉक्टर के चल रहींं
जिले की 49 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (पीएचसी) में से अधिकांश में चिकित्सा अधिकारी नहीं हैं। इनमें फार्मासिस्ट या आयुष अधिकारियों के भरोसे मरहम-पट्टी की सुविधा ही उपलब्ध है।
अस्पतालों की स्थिति (स्वीकृत और रिक्त पद):
हीरानगर सीएचसी:
विशेषज्ञ (5) – 2 रिक्त
चिकित्सा अधिकारी (10) – 3 रिक्त
बसोहली सीएचसी:
विशेषज्ञ (5) – 5 रिक्त
चिकित्सा अधिकारी (11) – 7 रिक्त
ट्रॉमा सेंटर महानपुर:
विशेषज्ञ (10) – 8 रिक्त
चिकित्सा अधिकारी (7) – 3 रिक्त
बनी सीएचसी:
विशेषज्ञ (5) – 4 रिक्त
चिकित्सा अधिकारी (12) – 8 रिक्त
परोल सीएचसी:
विशेषज्ञ (5) – 4 रिक्त
चिकित्सा अधिकारी (11) – 3 रिक्त
बिलावर सीएचसी:
विशेषज्ञ (6) – 3 रिक्त
चिकित्सा अधिकारी (10) – 5 रिक्त
महात्मा गांधी अस्पताल:
विशेषज्ञ (3) – 3 रिक्त
चिकित्सा अधिकारी (10) – 9 रिक्त
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जिले में 70 फीसदी तक डॉक्टरों की कमी एक गंभीर मुद्दा है। जम्मू-पठानकोट नेशनल हाईवे के साथ-साथ यह जिला दूरदराज पहाड़ी इलाके से सटा है। विधानसभा में भी यह मुद्दा सरकार के समक्ष लाया है और मात्र 30-30 डॉक्टर से जिले के लोगों को स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध करवाना कतई संभव नहीं है। सरकार को इस पर गंभीरता से विचार करने और डॉक्टरों की तत्काल तैनाती करने की जरूरत है।
-राजीव जसरोटिया, विधायक, जसरोटा