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12 ईंट भट्ठों का निरीक्षण

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कठुआ। जिले में दर्जनों भट्ठों में से अधिकतर बिना लाइसेंस रिन्यूल के ही चल रहे हैं। जिला उपायुक्त की ओर से गठित तहसील स्तरीय कमेटियों की जांच में यह खुलासा हुआ है। अमर उजाला में खबर छपने के बाद संज्ञान लेते हुए जिला उपायुक्त ने तहसील स्तरीय कमेटियों का गठन किया था। इसमें हीरानगर तहसील कमेटी ने जहां बीते पखवाड़े में हीरानगर तहसील में चल रहे ईंट भट्ठों की जांच की थी वहीं सोमवार को कठुआ तहसील में गठित टीम भी हरकत में आ गई। कठुआ के विभिन्न इलाकों में चल रहे 12 ईंट भट्ठों की प्रशासनिक टीम ने जांच शुरू कर दी है। सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार निरीक्षण में 70 प्रतिशत ईंट भट्ठों के लाइसेंस रिन्यू ही नहीं हुए हैं। ऐसे में प्रशासन को धत्ता बताते हुए ईंट भट्ठे अवैध रूप से प्रशासन की नाक तले दिन और रात धड़ल्ले से चल रहे हैं। कायदे से जिस जगह से ईंट बनाने के लिए इन्हें मिट्टी उठानी होती है वो भी कृषि विभाग से नोटिफाई करवानी पड़ती है। ऐसे में खेतिहर भूमि को नुकसान न हो यह सुनिश्चित किया जाता है, लेकिन हैरत की बात है कि अधिकतर ईंट भट्ठे न तो इसे नोटिफाई करवाते हैं और न ही विभाग से कोई एनओसी हासिल करते हैं। वहीं, वायु प्रदूषण के साथ ही मनमाने तरीके से मिट्टी उठा कर पर्यावरण के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है।
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जांच के लिए पहुंची टीम में सहायक आयुक्त राजस्व देविंद्र पाल, कृषि विभाग के एसडीएओ संजीव राय, नायब तहसीलदार, लोक निर्माण विभाग, खनन विभाग सहित अन्य विभागों के अधिकारी भी मौजूद रहे। उन्होंने संचालकों को दो टूक निर्देश दिए हैं कि जल्द से जल्द पूरे दस्तावेज टीम सदस्यों के पास फाइल बनाकर जमा करवाए जाएं ताकि उनकी पूरी तरह से जांच की जा सके।

रेट लिस्ट को लेकर होनी चाहिए जांच
ईंट भट्ठे के कारोबार में मुनाफाखोरी का खेल धड़ल्ले से जारी है। फिलहाल जहां ईंट भट्ठों के दाम निधार्रित होने के बावजूद भी अमल में नहीं लाए जा रहे हैं वहीं संचालकों की मनमानी जारी है। उपभोक्ताओं को न तो ईंट की खरीद की एवज में पक्की रसीद दी जाती है और न ही सरकारी रेट के अनुसार ईंट उपलब्ध करवाई जाती हैं। उपभोक्ताओं ने बताया कि मनमानी इस कदर हावी है कि पूछने पर साफ कह दिया जाता है रसीद चाहिए तो कहीं और से ईंट ले लें। लेकिन सभी भट्ठों में हालात ऐसे हैं जिसके कारण उपभोक्ताओं के अधिकारों को भी जमकर हनन हो रहा है और प्रशासन सहित संबंधित विभाग तमाशा देख रहे हैं।
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पर्यावरण को कर रहे जहरीला
जिला में चल रहे तीन दर्जन के लगभग ईंट भट्ठे धड़ल्ले से धुंआ दिन-रात छोड़ रहे हैं। हैरानी की बात है कि इनमें से अधिकतर ने पर्यावरण प्रभाव आंकलन भी करवा लिया है, जिसके आधार पर इन्हें हानिकारक नहीं बताया गया है। पुरानी पद्धति से चल रहे इन ईंट भट्ठों को हालांकि वर्ष 2021 के मार्च माह से पहले नई तकनीक पर शिफ्ट करना है, लेकिन इससे पहले लोगों को प्रदूषण झेलना ही होगा। सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार विभिन्न विभागों की ओर से ईंट भट्ठा संचालकों को बाकायदा एनओसी भी जारी कर दी गई हैं। मनमाने दाम और पर्यावरण को दूषित कर रहे इन ईंट भट्ठों की असलियत नेशनल हाईवे से गुजरते समय सक्ता चक और पल्ली मोड़, हीरानगर के नजदीक साफ दिखाई देती है लेकिन जिम्मेदार विभागों को यह नजर नहीं आ रहा है।
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