बारह वर्ष के बाद बड़े पैमाने पर पलायन के हालात बनने से 57 गांवों पर खतरा मंडराने लगा है। भारत-पाकिस्तान अंतर्राष्ट्रीय सीमा से पांच किलोमीटर भीतर क्षेत्र के दायरे को संवेदनशील माना जाता है।
कठुआ जिले की हद में कुल 57 गांव पड़ते हैं जिनकी आबादी 30 हजार से अधिक है। बीती रात को भीषण गोलाबारी को देखते हुए जीरो लाइन से एक किलोमीटर के दायरे में पड़ते 24 गांवों को खाली करवा लिया गया है।
19 अन्य गांवों से आंशिक पलायन करवाया गया है लेकिन इसके बाद अगले चार किलोमीटर का इलाका भी संवेदनशील है जिसे जरूरत पड़ने पर खाली करवाया जा सकता है।
प्रशासन द्वारा पुनर्वास के लिए तैयार की गई वैकल्पिक योजना में जीरो लाइन से पांच किलोमीटर फांसले तक कुल 57 गांव चिह्नित किए गए हैं जिनकी कुल आबादी 30060 है।