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जब रुक जाता है भगवान भास्कर का रथ

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बिलावर। पौराणिक मान्यता के अनुसार रथखड़ा वह दिन है, जब भगवान भास्कर का रथ भी कुछ समय के लिए रुक जाता है। दिन और रात बराबर हो जाते हैं। इसके बाद दिन की घटी हुई अवधि बढ़ना शुरू हो जाती है और रात की अवधि घटना शुरू हो जाती है जो क्रम जून माह तक चलता है। सर्दियों के मौसम में इस दिन के बाद से परिवर्तन होना शुरू माना जाता है। मौसम बदलने की प्रक्रिया को भारतीय शास्त्रों में रथखड़ा का नाम दिया गया है। उपजिला की पंचायत कोहग में भगवान नरसिंह देव मंदिर में रथ खड़ा के उपलक्ष्य पर एक विशाल भंडारे का आयोजन हुआ। इसमें स्थानीय लोगों के साथ पंजाब, जम्मू, कठुआ, सांबा, उधमपुर और अन्य कई इलाकों से लोग कोहग में स्थित भगवान विष्णु के दर्शन के लिए हजारों की संख्या में पहुंचे।
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नरसिंह देव मंदिर के पुजारी मंगतराम भगत, समरदीप और अन्य ने बताया के सुबह पांच बजे से ही लोग भगवान विष्णु के दर्शन के लिए पहुंचना शुरू हो गए थे और सुबह नौ बजे यहां पर आए लोगों के लिए भंडारा खोल दिया गया, जो देर शाम तक चलता रहा। इस भंडारे के आयोजन में कोहग निवासियों का बड़ा योगदान रहता है, जो सदियों से हर वर्ष हो रहे इस भंडारे में बढ़-चढ़कर भाग लेते हैं और इस भंडारे को सफल बनाते हैं। इस अवसर पर नरसिंह मंदिर के प्रांगण में जम्मू और कश्मीर एकेडमी ऑफ आर्ट एंड कल्चर की ओर से डोगरी में सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी प्रस्तुत की गईं। इसमें बिलावर से ओम बसोत्रा और पार्टी, उधमपुर से शौलो राम एंड पार्टी, मनवाल से रामदित्ता और पार्टी ने नगरी में प्रस्तुतियां प्रस्तुत कीं जो यहां पर आए लोगों के लिए आरक्षण का केंद्र रही और लोगों ने इस कार्यक्रम का भरपूर आनंद लिया और कलाकारों की सराहना भी की। गौरतलब है कि यह भंडारा हर वर्ष नरसिंह देव के मंदिर कोहग में रथखड़ा के उपलक्ष्य पर आयोजित किया जाता है। लगातार पिछले कई हजारों वर्षों से यह प्रथा चली आ रही है।
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