कठुआ। दिवाली के दिन जहां पूरे शहर में चहल-पहल बढ़ गई थी, वहीं पीएचई विभाग के सीपी वर्कर्स के घर सन्नाटा पसरा रहा। रात में भी उनके घरों पर बच्चे पटाखे नहीं फोड़ पाए। इसकी वजह यह रही कि पैसे नहीं होने से सीपी वर्कर्स पूरी रात कार्यालय में ही रहे और सुबह होने पर घर गए।
पीएचई विभाग के सीपी वर्कर्स को 50 माह से वेतन नहीं मिला है। अपना बकाया वेतन जारी करने और स्थायी करने की मांग पर वे कई दिनों से कार्यालय परिसर में धरना दे रहे हैं, लेकिन सरकार उनकी मांगों को नहीं पूरा कर रही है। यहां तक कि सरकार ने यह भी नहीं सोचा कि बिना वेतन भला सीपी वर्कर्स दिवाली का त्योहार कैसे मनाएंगे। ऐसे में वे दिवाली के दिन सुबह धरना देने के लिए तो अपने घर से निकले, लेकिन जेब में पैसे नहीं होने से रात में घर नहीं गए। शहर में भी वैसे तो तमाम संस्थाएं और जागरूक नागरिक हैं, लेकिन किसी ने भी यह नहीं सोचा कि सीपी वर्कर्स की दिवाली कैसे मनेगी। कोई जनप्रतिनिधि भी इस मामले में उनके साथ नहीं खड़ा नजर आया। जाहिर है अन्य त्योहारों की तरह ही दिवाली की यह रात सीपी वर्कर्स के लिए बड़ी भारी रही। उन्होंने भारी मन से पूरी रात अपने बच्चों और परिवार को याद करते हुए गुजारी। उन्हें डर था कि यदि वे घर गए तो कहीं बच्चे दिवाली मनाने के लिए पैसे न मांग लें।
कुछ सीपी वर्कर्स ने गुस्से में कहा कि उनके लिए रोशनी का यह पर्व, काला दिवस जैसा हो गया है। पूरे शहर में हर किसी के बच्चे पटाखे फोड़ रहे हैं। घर में पकवान बन रहे हैं। रिश्तेदारों को मिठाइयां दी जा रही हैं, पर वे यह सब नहीं कर पा रहे। उनके पास बच्चों को पटाखे और मिठाई खरीदकर देने के लिए एक पैसा नहीं है। मजबूर होकर उन्हें सब डिवीजन कार्यालय में ही रात बितानी पड़ी है।
सरकार ने नहीं निभाया दीपावली से पूर्व चार माह का वेतन देने का वादा
पीएचई डेलीवेजर एसोसिएशन अध्यक्ष शिव नारायण सिंह ने कहा कि उन्होंने राज्यपाल, मुख्य सचिव, विभागीय अधिकारियों के साथ ही हर संभव दरवाजे पर दस्तक दी और अपनी मांगों से अवगत करवाया, लेकिन उन्हें हर बार झूठे आश्वासन ही मिले हैं। आश्वासन दिया गया कि दिवाली से पूर्व चार महीने का वेतन जारी कर दिया जाएगा, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ। दिवाली के दिन भगवान राम अपने घर आए थे, लेकिन यहां तो वर्कर्स को अपने परिवार वालों और बच्चों से मुंह छुपाना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि ऐसे में उनके लिए इस पर्व का कोई महत्व नहीं है।