फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

J&K: नाम का जच्चा-बच्चा अस्पताल, वादे और घोषणाएं तो हुईं, पर सुविधाएं बढ़ाने पर नहीं हुआ काम

Sun, 07 Oct 2018 01:55 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
विज्ञापन
- फोटो : Demo Pic
विज्ञापन
कठुआ जिले में मेडिकल कॉलेज की कक्षाएं अगले सत्र यानी जून 2019 से लगाने की तैयारी पूरी कर ली गई है। इस कवायद में महात्मा गांधी जच्चा-बच्चा अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाओं को जल्द जिला अस्पताल कठुआ में शिफ्ट कर दिया जाएगा। स्वास्थ्य और चिकित्सा सेवाएं विभाग के संयुक्त निदेशक ने गत सप्ताह स्वास्थ्य निदेशक जम्मू को इमारत उपलब्ध करवाते हुए जच्चा-बच्चा अस्पताल की सेवाएं जिला अस्पताल में शिफ्ट किए जाने की मांग की थी। स्वास्थ्य निदेशालय ने इस संबंध में जिला स्वास्थ्य विभाग को निर्देश जारी कर दिए हैं।
विज्ञापन


मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. अशोक चौधरी ने बताया कि स्वास्थ्य निदेशालय के निर्देश के जच्चा-बच्चा अस्पताल में उपलब्ध सेवाओं को जिला अस्पताल में सप्ताह के भीतर ही शिफ्ट करने की तैयारी है। इसके बाद मुखर्जी चौक से सटी जच्चा-बच्चा अस्पताल की इमारत में मेडिकल कॉलेज की कक्षाओं को चलाने के लिए सिविल कार्य अंजाम दिए जाएंगे। जानकारों की मानें तो मेडिकल कॉलेज कठुआ की कक्षाएं जच्चा-बच्चा अस्पताल में चलाने से पूर्व बाकायदा विभाग को मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया से इसकी इंस्पेक्शन करवानी होगी।

जिस इमारत में कक्षाएं चलाई जाएंगी और मेडिकल कॉलेज के विद्यार्थियों के लिए क्या क्या सुविधाएं यहां रहेंगी इसकी जांच के लिए काउंसिल की टीम दिसबर माह तक इंस्पेक्शन कर सकती है। जुलाई 2018 में विभाग की ओर से मेडिकल काउंसिल को कॉलेज के लिए आवेदन जारी किया जा चुका है। उल्लेख्नीय है कि कठुआ मेडिकल कॉलेज में प्रत्येक वर्ष 100 सीट अलॉट किए गए हैं और बाकायदा जिला के सबसे बड़े स्वास्थ्य संस्थान में डॉक्टरों और टेक्नीकल स्टाफ की भी सौ के लिए लगभग पोस्ट हैं।
विज्ञापन

 
विज्ञापन

नाम का जच्चा-बच्चा अस्पताल, वादे और घोषणाएं तो हुईं, पर सुविधाएं बढ़ाने पर नहीं हुआ काम

कठुआ शहर के बीचों बीच स्वास्थ्य संस्थान की अहमियत काफी अधिक है। शायद इसे ही देखते हुए मुखर्जी चौक से सटकर जिला अस्पताल कठुआ शुरू किया गया था। शहर में ट्रैफिक के बढ़ने और सुविधाओं के विस्तार के बीच जिला अस्पताल को नेशनल हाईवे से सटकर इमारत और सुविधाएं तो मिल गईं, लेकिन पुरानी इमारत अपना वजूद तब से तलाश रही है।

दरअसल वर्ष 2003 में राज्य के दो जच्चा-बच्चा अस्पतालों को मंजूरी मिली। अनंतनाग का जच्चा-बच्चा अस्पताल को बेहतर तरीके से सुचारु हुआ, लेकिन कठुआ के जच्चा-बच्चा अस्पताल को लेकर कवायद कभी भी आगे नहीं बढ़ पाई। शहर के बीचों बीच महात्मा गांधी जच्चा-बच्चा अस्पताल की सुविधाएं मंजूरी के बाद भी जनरल अस्पताल से अधिक नहीं रहीं।

प्राथमिक चिकित्सा केंद्र की तरह चलते आए इस अस्पताल को लेकर कई बार कवायद शुरू हुई और इसे 100 बेड के अस्पताल के साथ संपूर्ण स्वास्थ्य सुविधाओं से लैस करने के वादे भी हुए। डीपीआर से लेकर मंत्रियों के दौरे और काम शुरू करवाने की औपचारिकताओं से जच्चा-बच्चा अस्पताल आगे नहीं बढ़ पाया। अब हालत यह है कि शहर के बीचों-बीच इस अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाओं को ही जिला अस्पताल में शिफ्ट किया जा रहा है। उम्मीद है कि मेडिकल कॉलेज की अपनी इमारत तैयार होने के बाद यह सुविधाएं वापस पुरानी इमारत में उपलब्ध होंगी और इनका विस्तार भी होगा।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें