कठुआ जिले को चिनाब घाटी के साथ जोड़ने वाली परियोजना साल भर कनेक्टिविटी का बेहतर साधन
संवाद न्यूज एजेंसी
कठुआ। केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर में बुनियादी ढांचे को मजबूती देने के उद्देश्य से 10,637 करोड़ की लागत वाली 19 प्रमुख सड़क और सुरंग परियोजनाओं को मंजूरी दे दी है। कश्मीर पर केंद्र सरकार की नजर ए इनायत के बाद पिछले लगभग एक दशक से वादों में चल रही छत्रगलां टनल फिर सूची से नदारद दिखी है। कठुआ जिले को चिनाब घाटी के साथ जोड़ने वाली यह परियोजना साल भर कनेक्टिविटी का बेहतर साधन बनने का सपना दिखाती तो है लेकिन इसकी शुरूआत भी एक सपना बनी हुई है।
मंजूर की गई परियोजनाओं में पीर की गली सुरंग, साधना सुरंग, राष्ट्रीय राजमार्ग -701ए का जजनार–शोपियां सेक्शन, लाल चौक से परीमपोरा तक चार लेन फ्लाईओवर, त्रेहगाम–चमकोट सेक्शन, नारबल-गुलमर्ग मार्ग पर मगाम फ्लाईओवर, काजीगुंड बाइपास समेत कई महत्वपूर्ण कार्य शामिल हैं, जिनका उद्देश्य क्षेत्रीय कनेक्टिविटी, पर्यटन और विकास को बढ़ावा देना है। हालांकि जम्मू संभाग के दो महत्वपूर्ण हिस्सों को जोड़ने वाली छत्रगलां टनल इस सूची में शामिल नहीं रही।
ऐसे में स्थानीय लोगों में भारी निराशा है। इसी साल जेड मोड़ टनल उद्घाटन समारोह के दौरान केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने इस टनल को मंजूरी दिए जाने का ऐलान भी किया था। भद्रवाह को बनी–बसोहली से जोड़ने वाली यह प्रस्तावित सुरंग लंबे समय से लोगों की मांग रही है, जो क्षेत्र के आर्थिक और पर्यटन परिदृश्य के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। उधर, मामले पर क्षेत्रीय नेता और जनप्रतिनिधियों की चुप्पी अब चर्चा का विषय बन चुकी है। वर्षों से दावे और घोषणाएं करने के बावजूद, छत्रगलां सुरंग के बाहर रह जाने पर लोगों के साथ साथ बनी के जनप्रतिनिधि भी नाराज हैं। विधायक डॉ रामेश्वर सिंह ने कहा कि भेदभाव के आरोप कांग्रेस पर लगते थे। लेकिन इस बार की मंजूर हुई परियोजनाओं में भी पीर पंजाल और कश्मीर की ओर ध्यान दिया गया है। भाजपा की केंद्र सरकार कश्मीर केंद्रित काम कर रही है। पहले भी जम्मू से भेदभाव होता था और अब भी जम्मू से भेदभाव का सिलसिला जारी है। कटली से धमान टनल परियोजना को भी मंजूरी नहीं मिली। इससे क्षेत्र के लोगों में निराशा है।