बसोहली। एक तरफ सरकार बिजली ढांचे में सुधार करने के बड़े-बड़े दावे करती है, पर ग्रामीण इलाकों में ये दावे दम तोड़ते नजर आ रहे हैं। तहसील का दन्ना गांव सरकार के इन दावों की पोल खोल देता है। यहां बिजली की सप्लाई के लिए लगाए गए खंभे जर्जर हो गए हैं। इतना ही नहीं, खंभे नहीं हैं तो बिजली के तारों को हरे पेड़ों में बांध दिया गया है, जो कभी भी जानलेवा साबित हो सकता है।
दन्ना गांव में बहुत से ऐसे स्थान हैं, जहां बिजली के तार जमीन से मात्र 6-7 फीट की ऊंचाई पर लटक रहे हैं। पोल नहीं होने से तारों को पेडों के सहारे बांधा गया है, जो कि हादसो को न्योता दे रहे हैं। विभागीय लापरवाही से ग्रामीणों में खासा रोष है। ग्रामीणों ने बिजली मंत्री से मांग की है कि वे दन्ना गांव में बिजली के खंभे लगवाने और हवा में लटकते तारों को ठीक करवाने के लिए विभाग के अधिकारियों को निर्देश दें। ग्रामीण रूप सिंह ने बताया कि गांव के एक किलोमीटर के दायरे में लगभग सात घर ऐसे है जहां लोगों ने बिना सिक्योरिटी दिए 200 से 300 मीटर प्राइवेट बिजली के तार खरीदकर अपने घरों तक बिजली पहुंचाने का काम किया है, जिनका किराया वहां के लाइनमैन ले रहे हैं।