कठुआ।
अब वह दिन दूर नहीं, जब कठुआ के आम और रियासी के खट्टे फलों का स्वाद राज्य ही नहीं बाहर भी लुभाएगा। कठुआ के रसीले आमों से तैयार अचार, जूस, पल्प, अमावट आदि को देश के अन्य राज्यों में भी भेजा जाएगा। कठुआ में 451 लाख की लागत से मैंगो विलेज और रियासी में 272 लाख से साइट्रस विलेज बनना प्रस्तावित है। दोनों प्रोजेक्टों पर काम इसी साल शुरू हो जाएगा। खास बात यह है कि जिन गांवों में मैंगो विलेज प्रस्तावित है, वे सभी कंडी इलाके के हैं।
मौजूदा गठबंधन सरकार के पहले बजट में कठुआ में मैंगो विलेज की मांग को वित्त मंत्री ने मान लिया था। इसके बाद जिला विकास बोर्ड की बैठक इसे मंजूरी भी मिल गई, लेकिन वित्त विभाग से धन वर्षा का इंतजार है। सूत्रों की मानें तो इसी साल इन दोनों प्रोजेक्ट पर काम शुरू होने जा रहा है। शेर-ए-कश्मीर कृषि, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय जम्मू ने बागवानी विभाग के इन दोनों गांवों को स्थापित करने के लिए भेजी गई डीपीआर की पुष्टि कर दी है। विश्वविद्यालय के अनुसंधान निदेशालय ने रियासी के पौनी में कुंड-कनयारी को साइट्रस यानी खट्टे फलों की पैदावार और कठुआ के विभिन्न गांव आम की पैदावार के लिए उपयुक्त पाए हैं। इसकी रिपोर्ट हाल ही में राज्य सरकार के बागवानी विभाग में आयुक्त सचिव को भी भेजी जा चुकी है। उधर, रिवाइज्ड डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट फंड की मंजूरी के लिए वित्त विभाग को वर्ष 2017 में ही भेजी जा चुकी थी। कठुआ जिले के कठुआ और बरनोटी ब्लाक के 1454 हेक्टेयर में लगभग 2430 मीट्रिक टन आम की पैदावार होती है। डीपीआर के तहत चार साल में 100 हेक्टेयर क्षेत्र को कवर किया जाएगा, जिसमें प्रति वर्ष 25 हेक्टेयर भूमि पर आम की पैदावार को बेहतर करने पर काम होगा।
मैंगो विलेज के लिए डीपीआर में दो क्लस्टर
मैंगो विलेज के लिए दो क्लस्टर डीपीआर में प्रस्तावित हैं। पहले क्लस्टर में लोगेट, सहार, शेर कोटला, कुमरी, कठेरा और जंगलोट शामिल हैं, तो दूसरे क्लस्टर में बरवाल, उत्तरी, नन्नन, भल्लड़ और बुद्धि को शामिल किया गया है। क्षेत्र विस्तार के लिए राज्य के हिस्से में 195 लाख और किसानों के हिस्से में 195 लाख की राशि प्रस्तावित की गई है। अन्य कार्यों के लिए लगभग 256 लाख रुपये प्रस्तावित हैं। मैंगो विलेज में आम की प्रसंस्करण इकाइयां भी स्थापित की जाएंगी, जहां से आम के अचार, आम का रस, आम का पल्प, अमावट जैसे उत्पाद तैयार होंगे।
संशोधित हुई डीपीआर
20 जून, 2015 को कठुआ जिला विकास बोर्ड (डीडीबी) की बैठक में कश्मीर के सेब और खुमानी गांवों की तर्ज पर कठुआ में मैंगो विलेज स्थापित करने की घोषणा की गई थी। प्रतिष्ठित प्रोजेक्ट के लिए डीपीआर बागवानी विभाग ने तैयार की थी, लेकिन कुछ कमियों को देखकर विभाग ने डीपीआर को फिर से संशोधित किया।
क्या कहते हैं विधायक
कठुआ विधायक राजीव जसरोटिया ने बताया कि पिछले तीन साल से इसके लिए प्रयास किए जा रहे हैं। हमारे पास ऐसी भूमि है, जहां किसानों को बढ़ावा देकर आम का बेहतर उत्पादन किया जा सकता है। कठुआ के आम अन्य राज्यों में भी जाने पहचाने जाएंगे। इससे निसंदेह किसानों को आर्थिक लाभ होगा। इसी वर्ष इसे शुरू करवाने की योजना है।