क्राइम ब्रांच ने जांच हाथ में आते ही किस तरह से क्राइम सीन के साथ खेला। क्राइम ब्रांच ने बताया कि बच्ची के कपड़े और शव मिट्टी में लिपटे थे। जिसे देवस्थान में रखा गया। यह देवस्थान पूरी तरह से पक्का बना हुआ है, जिसमें मिट्टी का कोई सवाल ही नहीं। क्राइम ब्रांच ने बताया कि बच्ची के बाल देवस्थान से मिले। जबकि अपनी चार्जशीट में क्राइम ब्रांच ने ही कहा कि देवस्थान को दिन में तीन बार धोया गया। तो इसके बाद यह कैसे संभव है कि देवस्थान धोने के बाद वहां से बच्ची के बाल मिले हों।
यह मामला ग्लोबल स्तर पर चर्चित हुआ। क्राइम ब्रांच ने केस की पूरी कहानी को ही बदल दिया। आरोपियों को प्रताड़ित करके उनसे कबूलनामा करवाया। यह बहुत आसान है कि बच्ची के बाल कहीं से उठाकर देवस्थान में जाकर रख दिए हों और उन्हीं के सैंपल को डीएनए से मिलाकर जांच में शामिल किया। अधिवक्ता जलाली ने कहा कि क्राइम ब्रांच की जांच की वजह से पूरे राष्ट्र और अंतर्राष्ट्रीय समुदाय ने यह विश्वास कर लिया कि जम्मू संभाग में रहने वाले लोग एक समुदाय से हैं। जो कुछ भी कर सकते हैं, यह मानवता के खिलाफ है।
क्राइम ब्रांच की इस तरह की जांच में सरकार ने गुज्जर समुदाय के लोगों द्वारा अवैध रूप से किए गए अतिक्रमण को संरक्षण देने वाले मामले को दबाने की कोशिश की है। यह लोग सरकार की जमीन पर अवैध रूप से कब्जा करके बैठे हैं।
क्राइम ब्रांच की जांच ने अलगाववादियों को लाभ पहुंचाने की कोशिश की है। जम्मू को सांप्रदायिकता पर बांटा गया। जम्मू संभाग को दो समुदाय के बीच बांटने में अलगाववादी सफल रहे हैं। जिसमें क्राइम ब्रांच की जांच ने अहम रोल निभाया।