बार-बार और जल्दी-जल्दी आ रहे भूकंपों ने आम लोगों ही नहीं, भूगर्भ विज्ञानियों को भी दहशत में डाल दिया है। हिमालय के अंदर हो रही हलचलें एक बड़े भूकंप की दस्तक दे रही हैं।
राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने भूकंप के लिहाज से जिन 26 शहरों को सर्वाधिक संवेदनशील माना है, उनमें जम्मू सिसमिक जोन 4 और श्रीनगर सिसमिक जोन 5 में आता है।
इनमें से कहीं भी 8.5 या इससे अधिक रिक्टर स्केल तीव्रता का भूकंप आया तो भीषण तबाही तय हो सकती है।
बुधवार को भूकंप के झटकों ने अवाम को पीओके से सटे पुंछ और बारामूला जिलों की याद दिलाई, जहां पर स्थानीय अवाम ने पहले भी इस कुदरती कहर का सामना किया था।
पूर्व मेयर कवींद्र गुप्ता और मनमोहन चौधरी का कहना है कि रियासत सिसमिक जोन पांच और चार में आती है। जोन जितना ज्यादा होगा, भूकंप का खतरा उतना ही अधिक होता है। इसके बावजूद आपदा प्रबंधन का सिस्टम कमजोर है।
मंडलायुक्त प्रदीप गुप्ता का कहना है कि उन्हें उस समय भूकंप की जानकारी मिली, जब वे मुख्य सचिव इकबाल खांडे के साथ सांबा जिले में विकास कार्यों की समीक्षा कर रहे थे।
उन्होंने बताया किश्तवाड़, रामबन और डोडा जिला प्रशासन को हिदायतें जारी कर आपदा प्रबंधन को सक्रिय किया गया। नुकसान का जायजा लेने के लिए संबंधित तहसीलदारों को निर्देश जारी किए गए हैं।