हंगुल उत्तर भारत और पाकिस्तान खासकर कश्मीर में पाई जाने वाली लाल हिरण की नस्ल है। हंगुल का वैज्ञानिक नाम सर्वस एलाफस हंगुल है। मानव जनसंख्या में बढ़ोतरी और जंगलों में अतिक्रमण बढ़ने से समय समय के साथ हंगुल की संख्या में गिरावट आती गई। इसका अवैध शिकार भी बढ़ा है। जम्मू-कश्मीर सरकार ने विश्व वन्य जीव निधि (वर्ल्ड वाइल्डलाइफ फंड) जैसे अंतरराष्ट्रीय संगठनों के साथ मिलकर इन्हें बचाने की एक योजना बनाई थी जो आगे चलकर प्रोजेक्ट हंगुल के नाम से मशहूर हुई।
लाल हिरण ज्यादातर यूरोप और अन्य ठंडे इलाकों में मिलने वाले जानवर हैं। भारतीय उपमहाद्वीप में हंगुल लाल हिरण की आखिरी नस्ल बची हुई है। हंगुल हिमालय की ऊंची पहाड़ियों, जंगलों और वादियों में मिलता है। देश में इसका वास कश्मीर और हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले में है। यह अक्सर 2 से लेकर 18 हिरणों के झुंड में रहते हैं। कश्मीर में यह मुख्यत: दाचीगाम राष्ट्रीय उद्यान में मिलता है।
मुख्य वन्यजीव वार्डन सुरेश कुमार गुप्ता ने कहा कि हंगुल की जल्द जनगणना करवाई जा रही है। किश्तवाड़ में भी हंगुल की मौजूदगी को तलाशने के उचित प्रयास किए जा रहे हैं। हंगुल के प्रजनन को भी बढ़ावा दिया जाएगा। इसके लिए कार्य योजना बनाई जा रही है।