कुछ दिनों पहले ही घाटी के बागवानों पर मौसम का कहर टूटा। सेब के फूलों पर गिरे ओलों ने किसानों की पिछले साल हुई फसल की बर्बादी से बाहर निकलने की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। बादाम और अखरोट की फसल को भी ओलों ने भारी नुकसान पहुंचाया है।
वहीं, सांबा के सीमावर्ती इलाके में रह रहे किसानों की गेहूं की फसल इस समय पक कर तैयार है, लेकिन पिछले दो हफ्ते के अंदर ही पाकिस्तान की तरफ से तीन बार गोलाबारी ने उन्हें डरा दिया है। इस डर के बीच वे जान की बाजी लगाकर तेजी से अपनी फसल को समेटने में जुट गए हैं।
कुछ दिन पहले कश्मीर के कई हिस्सों में जमकर ओले गिरे। इससे सेब की फसल को नुकसान पहुंचा है। इस समय सेब के पेड़ में फूल आ चुके हैं। ओलों ने फूलों को काफी नुकसान पहुंचाया। बादाम और अखरोट की फसल को भी ओलों से नुकसान पहुंचा है। किसान पहले ही इसे लेकर डर रहे थे और वहीं हुआ है। शोपियां फल उत्पादन एसोसिएशन के प्रधान मीर मोहम्मद अमीन का कहना है कि इस साल सेब में जमकर फूल आए थे।
उम्मीद थी की फसल काफी अच्छी होगी। ऐसा होता तो पिछले साल हुए नुकसान की भरपाई होती, लेकिन ओलों ने बागवानों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। यदि आगे भी ऐसे ही ओले गिरे तो सेब की फसल को जबरदस्त नुकसान हो जाएगा। करीब 15 फीसदी तक पैदावार ओले गिरने से प्रभावित हुई है। इस समय करीब पांच लाख हेक्टेयर पर कश्मीर संभाग में सेब की फसल लगी हुई है। भविष्य में फिर ओले गिरते हैं तो नुकसान बढ़ जाएगा।