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- फोटो : अमर उजाला
हर साल बरसात में नाले उफान पर आते हैं और भंयकर तबाही मचाते हैं। इस बार भी ऐसा ही हुआ। नगर निगम हर बार नालों की समस्या हल करने का दावा करता है। शहर में 2018 से लेकर अभी तक अमृत योजना के तहत 300 करोड़ से ज्यादा राशि 171 नाले और नालियों पर खर्च की जा चुकी है, लेकिन बरसात में सारे प्रबंध ध्वस्त हो जाते हैं और लोगों को करोड़ों का नुकसान झेलना पड़ता है।
नानक नगर के नालों को गहरा करने पर दो साल से काम चल रहा है। सितंबर 2020 में फिर शुरू हुआ। पिछली बरसात में भी नुकसान हुआ था। इस बार ऊंची क्रेट वॉल लगाने पर भी काम चलता रहा। पहले चरण में ऐसी जगहों को चिह्नित किया गया, जहां पर नाले खूब कहर बरपाते हैं। इस बार भी नाले उसी जगह में कहर बरपा गए, जहां करोड़ों खर्च हुए थे।
इसी तरह कालिका कॉलोनी में भी नाला चार फुट तक गहरा कर दिया गया, लेकिन जैसे ही पानी का स्तर बढ़ा तो दस घरों को तबाह कर गया। इसके अलावा पॉश इलाके त्रिकुटा नगर, शास्त्री नगर और गांधी नगर में भी नालियों के सुधार पर काफी पैसा खर्चा गया, लेकिन पानी बढ़ने से निकासी नहीं हो पाई और पानी सड़कों पर आ गया। अब बड़ा सवाल यह है कि तीन सौ करोड़ रुपये नगर निगम ने कहां खर्च किए हैं। इसका लाभ प्रभावित लोगों को नहीं मिल पाया है।
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यही नहीं नगर निगम के बचाव के लिए किए सारे प्रबंध भी धराशाही हो गए। निगम की टीमें बारिश थमने के बाद लोगों के घरों में पहुंची। इस पर भी लोगों ने एतराज जताया। लोग टीम से बार-बार संपर्क करते रहे मगर कोई नहंी आया। ऐसे में लोगों ने खुद ही जरूरी सामान उठाकर सुरक्षित जगहों में पहुंचाया।
अतिक्रमण पर झाड़ दिया पल्ला
नालों के किनारे अतिक्रमण के कारण काम नहीं हो पाया है। नाले सिकुड़ गए हैं, इसी कारण पानी ओवरफ्लो होता है। टीमों ने प्रभावित इलाकों का दौरा किया है। समस्या का हल करवाया जाएगा। अगली बरसात में तबाही न हो इसके लिए पुख्ता प्रबंध किए जाएंगे।
- हरेंद्र सिंह, मुख्य यातायात अधिकारी, नगर निगम