जम्मू कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने बुधवार को श्रीनगर के डाऊनटाऊन में इलाही बाग इंडोर स्टेडियम का उद्घाटन किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि ये कश्मीर में आए बदलाव की निशानी है। सिन्हा ने कहा कि उन्हें स्थानीय लोगों द्वारा बताया गया कि 75 साल में पहली बार कोई राज्य का मुखिया डाऊनटाऊन आया है।
अगस्त 2019 में जम्मू कश्मीर में अनुच्छेद 370 हटाया गया। इसके बाद जम्मू कश्मीर के हालात को संभालने की जिम्मेदारी उपराज्यपाल रही। हालात सामान्य होने के बाद घाटी में विकास कार्यों को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी भी उपराज्यपाल के पास ही है। बीते तीन साल में इस वजह से घाटी में कई बदलाव हो चुके हैं।
आजादी के अमृत महोत्सव में लोगों ने बढ़-चढ़कर लिया हिस्सा
उपराज्यपाल मनोज सिन्हा सप्ताहांत में आम तौर पर दिल्ली आते हैं। पिछले दौरे में उन्होंने बताया कि आजादी के अमृत महोत्सव में जिस तरह से जम्मू-कश्मीर के लोगों ने बढ़कर हिस्सा लिया। यह जम्मू कश्मीर के आम लोगों में आ रहे बदलाव को स्पष्ट रूप से दर्शाता है।
सिन्हा कहते हैं कि हमारा मकसद कश्मीर के लोगों के साथ मिलकर, उनके दु:ख, दर्द को साझा करके जम्मू-कश्मीर को देश का सर्वश्रेष्ठ विकसित राज्य बनाना है। सिन्हा कहते हैं कि सरकार के प्रयासों और लोगों के सहयोग से इसमें सफलता मिल रही है।
राज्य के मुख्य सचिव अरुण मेहता भी बताते हैं कि केन्द्र और राज्य सरकार की योजनाओं से स्थानीय लोगों को जोड़कर विकास की परियोजना को गति दी जा रही है। राज्य में अब पर्यटकों की संख्या भी बढ़ रही है और विश्वास को मजबूती देने का प्रयास है।
घाटी में कब होंगे चुनाव?
राज्य से केंद्र शासित प्रदेश बन चुकी घाटी में जल्द चुनाव होने की भी अटकलें लगाई जा रही है। चुनाव आयोग परिसीमन का काम भी पूरा कर चुका है। जम्मू-कश्मीर के प्रशासनिक गलियारे के लोग बताते हैं चुनाव की काफी तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। इसी महीने में समग्र मतदाता सूचियों का मसौदा प्रकाशित होना है। नवंबर तक मतदाता सूची पूरी तरह से तैयार हो जाएगी। माना जा रहा है कि अगले साल की पहली तिमाही तक जम्मू-कश्मीर में चुनाव प्रक्रिया शुरू हो सकती है।