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जम्मू-कश्मीर: परिसीमन आयोग 6 से 9 जुलाई तक करेगा प्रदेश का दौरा, विभिन्न राजनीतिक दलों से होगा संवाद

Wed, 30 Jun 2021 02:55 PM IST
करिश्मा चिब न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू

सार

परिसीमन आयोग प्रशासनिक अफसरों और आईजी के साथ भी बैठक करेगा।
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परिसीमन आयोग छह जुलाई को करेगा जम्मू-कश्मीर का दौरा - फोटो : social media
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विस्तार
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परिसीमन आयोग 6 से 9 जुलाई तक जम्मू-कश्मीर का दौरा करेगा। इस दौरान आयोग विभिन्न राजनीतिक दलों के साथ संवाद भी करेगा। परिसीमन आयोग प्रशासनिक अफसरों और आईजी के साथ भी बैठक करेगा। सूत्रों ने बताया कि आयोग परिसीमन की प्रक्रिया को अगले दो तीन महीनों में पूरा करने की दिशा में प्रयासरत है। इसके तहत आयोग की टीम प्रदेश के विभिन्न जिलों का दौरा कर राजनीतिक दलों के नुमाइंदों के साथ ही विभिन्न संस्थाओं तथा आम जन से मुलाकात कर उनकी राय लेगी।

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आयोग की सांसदों के साथ बैठक जल्द
सूत्रों का कहना है आयोग की सांसदों के साथ बैठक जल्द होगी। एसोसिएट सदस्य के रूप में भाजपा के सांसद डा. जितेंद्र सिंह व जुगल किशोर शर्मा तथा नेकां के डा. फारूक अब्दुल्ला, हसनैन मसूदी व मोहम्मद अकबर लोन हैं। आयोग की पिछली बैठक से नेकां सांसद अलग रहे थे, लेकिन हाल में पार्टी ने स्पष्ट किया है कि उसे परिसीमन से कोई एतराज नहीं है। ऐसे में माना जा रहा है कि अगली बैठक में वे शामिल हो सकते हैं। प्रधानमंत्री ने भी सभी राजनीतिक दलों से परिसीमन में सहयोग की अपील की थी।

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बैठक के बाद परिसीमन में तेजी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ 24 जून को जम्मू-कश्मीर के नेताओं की हुई सर्वदलीय बैठक के बाद प्रदेश में परिसीमन को लेकर कवायद तेज हो गई है। परिसीमन आयोग पहली बार प्रदेश के चार दिवसीय दौरे पर छह जुलाई को श्रीनगर पहुंचेगा। नौ जुलाई तक आयोग विभिन्न राजनीतिक दलों के नुमाइंदों और प्रशासनिक अधिकारियों से बैठक कर सुझाव लेगा। यह फैसला आयोग की बुधवार को हुई वर्चुअल बैठक में किया गया।  

आयोग की अध्यक्ष न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में परिसीमन आयोग ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त सुशील चंद्रा की उपस्थिति में 6 से 9 जुलाई तक केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर की यात्रा करने का निर्णय लिया है। आयोग इस अवधि के दौरान राजनीतिक दलों, सार्वजनिक प्रतिनिधियों और प्रदेश के जिला निर्वाचन अधिकारियों से मिलेगा। 20 जिलों के उपायुक्तों सहित केंद्र शासित प्रदेश के प्रशासनिक अधिकारियों से बातचीत करके प्रत्यक्ष सूचना हासिल करेगा। साथ ही जम्मू और कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम 2019 के अंतर्गत परिसीमन प्रक्रिया से संबंधित इनपुट प्राप्त करेगा।

आयोग दो-दो दिन जम्मू और कश्मीर में रहेगा
आयोग अपने चार दिवसीय दौरे के तहत दो-दो दिन जम्मू और कश्मीर में रहेगा। छह जुलाई को श्रीनगर पहुंचकर दल नुमाइंदों से बात करेगा। अगले दिन सात जुलाई को पहलगाम जाएगा। जम्मू संभाग के दौरे पर यह दल आठ जुलाई को किश्तवाड़ और नौ जुलाई को जम्मू में रहेगा। 
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आयोग का एक साल बढ़ा है कार्यकाल, 1995 में तय हुआ था परिसीमन

परिसीमन आयोग का गठन मार्च 2020 में किया गया था। कोरोना महामारी को देखते हुए इसका कार्यकाल मार्च 2021 में एक वर्ष के लिए बढ़ा दिया गया था। जम्मू-कश्मीर के निर्वाचन आयुक्त आयोग के तीसरे सदस्य हैं। आयोग में लोकसभा अध्यक्ष द्वारा मनोनीत पांच एसोसिएट सदस्य भी हैं। इससे पहले आयोग ने बातचीत के लिए फरवरी में एसोसिएट सदस्यों को आमंत्रित किया था जिसमें दो एसोसिएट सदस्य भाजपा के डॉ. जितेंद्र सिंह व जुगल किशोर शर्मा शामिल हुए थे। नेकां के तीन सांसद बैठक में उपस्थित नहीं हुए। संकेत हैं कि अगली बैठक में नेकां के नुमाइंदे भी शामिल हो सकते हैं। 

आयोग को मिले प्रतिवेदन का लिया संज्ञान
आयोग ने जनगणना 2011 से संबंधित निर्वाचन क्षेत्रों के आंकड़ों, मानचित्र से संबंधित कई बैठकें पहले ही की थीं। परिसीमन से संबंधित सिविल सोसायटी, केंद्र शासित प्रदेश के सार्वजनिक सदस्यों से अनेक प्रतिवेदन प्राप्त हुए हैं। आयोग ने ऐसे सभी सुझावों को संज्ञान में लिया है और निर्देश दिया है कि परिसीमन से संबंधित जमीनी वास्तविकताओं के संदर्भ में इन सुझावों पर आगे विचार किया जा सकता है। आयोग को आशा है कि सभी हितधारक इस प्रयास में सहयोग करेंगे और बहुमूल्य सुझाव देंगे।

आयोग जल्द करना चाहता है परिसीमन
सूत्रों के मुताबिक 90 सीटों के लिए आयोग जल्दी ही परिसीमन तय करना चाहता है। सात सीटें बढ़नी हैं। पहले 83 सीटें (लद्दाख की चार सीटों को छोड़कर) थीं। इस दौरान यह चर्चा भी होगी कि किन क्षेत्रों को हटाया जाए और किसे शामिल किया जाए। आरक्षित सीटों पर भी विचार-विमर्श होगा। 24 सीटें पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर के लिए खाली रखी जाएंगी। पहली बार परिसीमन आयोग बाकी प्रदेशों की तरह ही अनुसूचित जातियों और जनजातियों के लिए आरक्षित सीटें भी घोषित करेगा।

1995 में तय हुआ था परिसीमन
जम्मू-कश्मीर में 1995 में विधानसभा क्षेत्रों का परिसीमन 1981 की आबादी के आधार पर किया गया था। इसके बाद  साल 2001 में परिसीमन होना था जिसे 2006 तक टाल दिया गया था। पिछले साल अगस्त में विशेष राज्य का दर्जा समाप्त होने के बाद नए परिसीमन का रास्ता साफ हो गया। प्रदेश में नए सिरे से परिसीमन को लेकर आयोग लगातार बैठकें कर रहा है।
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