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जम्मू-कश्मीर: 86 फीसदी कोविड बिस्तर पड़े खाली, फिर भी घरों में हो रहीं मौतें

Sun, 20 Jun 2021 06:23 PM IST
करिश्मा चिब न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू

सार

पिछले 19 दिन में प्रदेश में 20 संक्रमित लोगों को अस्पताल में मृत लाया गया। बड़ी संख्या में मौतें अस्पतालों में रिपोर्ट ही नहीं हो रहीं।
 
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जम्मू-कश्मीर में कोरोना वायरस - फोटो : बासित जरगर
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विस्तार
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जम्मू-कश्मीर में कोरोना संक्रमण के प्रसार पर नियंत्रण के बाद अस्पतालों में 86 फीसदी तक कोविड बिस्तर खाली पड़े हैं। इसके बावजूद घरों में संक्रमितों की मौत का सिलसिला जारी है। पिछले 19 दिन में ही प्रदेश के अस्पतालों में 20 संक्रमित मरीजों को घरों से मृत लाया गया है। यह वे मृतक हैं जिन्हें परिवार वाले आखिर समय में अस्पताल लाए, लेकिन बड़ी संख्या में ऐसे मृतक भी हैं जो संक्रमित होकर घरों में ही मर गए, मगर उनके परिवार वालों ने अस्पतालों में रिपोर्ट नहीं किया।

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कोरोना विशेषज्ञों के अनुसार घरों पर मरने वाले अधिकतर लोग डॉक्टरी परामर्श न लेकर संक्रमण को हल्के में लेकर उचित इलाज नहीं लेते हैं। जम्मू-कश्मीर में मई माह में कोरोना के पीक पर रहने से बड़ी संख्या में संक्रमित लोगों की घरों पर ही मौत हो गई थी। जून में संक्रमण के प्रसार पर नियंत्रण पाया गया, लेकिन अभी भी घरों में मौतों के मामले बढ़ रहे हैं। इनमें अधिकांश घरों से मृत लाए गए लोग 50-80 वर्ष की उम्र के बीच थे।

इन मामलों में देखा गया कि संक्रमित मरीज को उचित इलाज नहीं दिया गया, जिससे उसकी हालत लगातार बिगड़ती गई और मौत हो गई। ऐसे मामलों में अधिकांश के परिवार वाले भी कोरोना संक्रमण से पीड़ित हुए हैं। जीएमसी के माइक्रोबायोलाजी विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. संदीप डोगरा का कहना है कि घरों पर मर रहे संक्रमित मरीजों का मुख्य कारण उनका बेहतर इलाज न लेना और अस्पतालों से दूरी बनाना है।
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अभी भी कई लोग अस्पतालों में जाने से डर रहे हैं, लेकिन उन्हें समझना चाहिए कि संक्रमण का उचित इलाज उन्हें अस्पतालों में ही मिल सकता है। हालांकि संक्रमण के 80 फीसदी तक मामले माइल्ड या उनमें अधिक कोरोना संक्रमण के लक्षण नहीं होते हैं, लेकिन खासतौर पर उम्रदराज लोगों को हल्के लक्षण पर भी डॉक्टरी परामर्श लेना जरूरी है।
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इसमें मरीज की चिकित्सा स्थिति के हिसाब से ही उसे अस्पताल जाने की सलाह दी जाती है। लेकिन अभी भी लोग खुद ही घरों में अधिक संक्रमित होने वाले व्यक्तियों को भी घरेलू नुस्खे से ठीक करने में लगे हैं, जिससे उनकी मौत हो रही है। संक्रमण के दौरान सभी के लिए डॉक्टरी परामर्श लेना जरूरी है और अधिक उम्र वाले पीड़ितों को अस्पताल प्रशासन के संपर्क में रहना चाहिए।

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