पीपुल्स कांफ्रेंस के नेता पीर मंसूर ने परिसीमन आयोग के सदस्यों के साथ मुलाकात करने के बाद पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि उन्होंने आयोग के सामने अपना पक्ष रखा और जिस तरीके से उन्होंने हमें सुना हम उससे काफी संतुष्ट हैं। उन्होंने कहा कि जो बाहर लोगों में अफवाह, शंका और अविश्वास है वो सब बातें भी हमने आयोग के सदस्यों के सामने रखीं, जिसको लेकर उन्होंने आश्वासन दिलाया कि निर्वाचन क्षेत्रों का परिसीमन पारदर्शी तरीके से होगा।
मंसूर ने कहा आयोग ने कहा कि हम आप सबको आश्वासित करते हैं कि जो कुछ होगा पारदर्शी तरीके से और निष्पक्ष होगा। उन्होंने कहा कि यह जो परिसीमन प्रक्रिया जनसंख्या के आधार पर की जाएगी। वहीं यह पूछे जाने पर कि क्या वह चाहते हैं कि पांच अगस्त 2019 से पहले वाली स्थिति दी जाए, तो आयोग ने कहा कि बिलकुल हम चाहते हैं, लेकिन आज आयोग के सदस्य आए हैं, उन्हें राजनीति के साथ कोई लेना देना नहीं है।
पीसी के प्रतिनिधिमंडल ने ज्ञापन में आयोग से 2011 की जनगणना के आंकड़ों को अभ्यास के लिए बेंचमार्क के रूप में लेने और यथासंभव समान संख्या में लोगों के साथ निर्वाचन क्षेत्रों का परिसीमन करने का भी आग्रह किया।
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आयोग का आश्वासन, सुझाव-आपत्तियां के बाद होगा परिसीमन : अपनी पार्टी
अपनी पार्टी के मो रफी मीर ने आयोग के सदस्यों के साथ मुलाकात के बाद पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि हमने अपना पक्ष आयोग के सामने रखा और सबसे पहले यह बात की कि लोगों के मन में यह आशंका है कि परिसीमन आयोग ने कुछ चीजें पहले से तय कर ली हैं और वह अब लोगों की नजरों में आ जाएगा।
आयोग ने हमें आश्वासन दिया है कि ऐसा नहीं है। सभी सुझावों को लोगों के सामने रखा जाएगा और उसको लेकर लोगों की ओर से सुझाव और आपत्तियां भी ली जाएंगी। मीर ने कहा कि हमने यह भी मांग की कि परिसीमन की प्रक्रिया को 2011 की जनगणना के आधार पर सख्ती से किया जाए और उसी के अनुसार सीटों का फैसला किया जाए।
यह पूछे जाने पर कि बाकी राजनीतिक दल इस प्रक्रिया को गैर संवैधानिक मान रही हैं उन्होंने कहा कि यह उनका पक्ष है। मीर ने कहा कि हमें कोई ख़ुशी नहीं है कि परिसीमन की प्रक्रिया हो रही है, लेकिन एक आर्डर जारी किया गया है, जिसको लेकर हमें इसमें शामिल होना पड़ा। अगर हम इसमें शामिल नहीं होते तो लोगों का पक्ष हम नहीं रख पाते। रूठने से कुछ नहीं होगा।
इस बीच पीएजीडी की कुछ पार्टियों की ओर इशारे करते हुए उन्होंने कहा कि वह एकजुट हुए थे जम्मू कश्मीर के लोगों के हक की लड़ाई लड़ने के लिए और वह इसको लेकर एक राय नहीं बना पाए और कुछ ने बहिष्कार किया।