सीमापार से सिर कटी लाशें भेजने वाली पाकिस्तान फौज को भारतीय सेना ने मोहब्बत और इंसानियत का पाठ पढ़ाया है। 14 साल के जाहिद को भारतीय सेना ने नए कपड़े, मिठाइयां, चाकलेट और धार्मिक पुस्तकें देकर वापस पाकिस्तान उसके घर विदा किया। तीन दिन पहले वह बालाकोट में गलती से पीओके से नियंत्रण रेखा के इस पार आ गया था। सेना व कश्मीर पुलिस ने चक्कां दा बाग के रास्ते जाहिद को पाकिस्तानी सेना के हवाले कर दिया। चश्मदीदों के मुताबिक लौटते वक्त जाहिद भारतीय सेना को हाथ हिला का सलाम कर रहा था।
बीते 22 अप्रैल को जिले के मेंढर सब डिवीजन में तैनात भारतीय सेना के जवानों ने गश्त करते समय भारतीय क्षेत्र में घुस आए एक किशोर को पकड़ा था। बाद में उसे मेंढर पुलिस के हवाले कर दिया गया था। वहां पर पूछताछ में उसकी पहचान जाहिद पुत्र मोहम्मद आरिफ निवासी गांव नोटियाल जंदोत जिला बालाकोट पीओके के रूप में हुई थी।
पूछताछ के दौरान पता चला कि जाहिद दिमागी तौर पर कमजोर है, इसलिए गलती से इस तरफ आ गया था। इसके बाद पुलिस और भारतीय सेना के अधिकारी, पाकिस्तानी सेना से संपर्क कर जाहिद को उसे घर भेजने की कोशिश कर रहे थे। उन्हें बुधवार को सफलता मिली। पाकिस्तानी सेना ने भी जाहिद को वापस लेने पर स्वीकृति दी। इसके बाद जाहिद को उनके हवाले कर दिया गया। इस बारे में एसएसपी पुंछ राजीव पांडे ने बताया कि सेना एवं पुलिस ने मानवता के आधार पर गलती से इस तरफ आ गए पीओके के बच्चे को उसके परिवार वालों के पास भेज दिया है।
बुधवार देर शाम करीब पांच बजे जिले में नियंत्रण रेखा पर चक्कां दा बाग की राह-ए-मिलन के गेट भारतीय सेना के आग्रह पर खोले गए। यहां पर भारतीय सेना एवं पुलिस के अधिकारियों ने पाकिस्तानी सैन्य अधिकारियों से हाथ मिलाया और एक बार फिर मानवता को प्राथमिकता देते हुए पीओके से गलती से इस तरफ आ गए जाहिद को उसके परिवार से मिलाने के लिए उनके हवाले कर दिया। इसके बाद राह-ए-मिलन के गेट बंद कर दिए गए।