हंदवाड़ा की किशोरी को गैर कानूनी ढंग से पुलिस हिरासत में रखने की शिकायत के मामले का फैसला हाईकोर्ट ने सुरक्षित रख लिया है। बहरहाल कोर्ट ने किशोरी की मां को हलफनामा दाखिल करने को कहा है, जिसमें उसे कहना होगा कि उन्हें पुलिस सुरक्षा की जरूरत नहीं है।
हाईकोर्ट में जस्टिस मोहम्मद याकूब मीर और जस्टिस एएम मागरे की खंडपीठ ने किशोरी के पक्ष में पेश हुए वकील की दलीलें सुनीं। वकील ने कहा कि किशोरी और उसके परिवार वालों को बारह अप्रैल से पुलिस ने गैरकानूनी ढंग से हिरासत में रखा है।
हंदवाड़ा की किशोरी का मामला देख रही जम्मू एंड कश्मीर कोलीशन आफ सिविल सोसाइटी के प्रवक्ता ने यह जानकारी दी। प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि पुलिस ने नाबालिग लड़की और उसके परिवार वालों को अपनी हिरासत में रखकर उनकी इच्छाशक्ति को तोड़ने का भरसक प्रयास किया है। उन्हें प्रताड़ित किया जा रहा है।
किशोरी के साथ सैन्य जवान द्वारा छेड़छाड़ करने के आरोप पर 12 अप्रैल को उत्तरी कश्मीर के हंदवाड़ा कसबे में लोग सड़कों पर उतर आए थे। व्यापक विरोध प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा बलों की फायरिंग में इसी दिन तीन लोगों की मौत हो गई थी। इसके बाद अगले तीन दिनों के प्रदर्शन में दो और लोग मारे गए।
किशोरी ने पुलिस और ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट के समक्ष दिए बयान में छेड़छाड़ का कोई जिक्र नहीं किया। हालांकि उसने दो स्थानीय युवकों के नाम लेकर परेशान करने का आरोप लगाया था। पुलिस ने एक युवक को हिरासत में ले लिया है, जबकि दूसरे की तलाश की जा रही है। इस मामले में राज्य सरकार ने घटना की न्यायिक जांच का आदेश दिया है।