जम्मू कश्मीर हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि सरकारी कर्मचारी का एक स्थान और एक पद पर उसकी मर्जी से तबादला नहीं हो सकता। इसके अधिकार उसके पास नहीं हैं। न्यायाधीश जनक राज कोतवाल ने याची गुलाम अली मलिक की याचिका पर गौर करते हुए पाया याची राजस्व विभाग में कर्मचारी है।
वह चसाना जिला रियासी में नायब तहसीलदार के पद पर तैनात है। आदेश क्रमांक 248 आफ 2014 दिनांक 11 अगस्त 2014 के तहत उसका तबादला इंचार्ज नायब तहसीलदार कहारा डोडा में कर दिया गया।
याची ने इस आदेश को चुनौती दी। मामला 2010 का है। जब उसका तबादला किया और याची ने इसे निचली अदालत में चुनौती दी। निचली अदालत ने तबादले के आदेश पर स्टे जारी किया। निचली अदालत के फैसले के दौरान ही वित्त आयुक्त राजस्व ने उसका चसाना में तबादला कर दिया।
इसके बाद 25 मार्च 2016 को उसका तबादला आदेश नायब तहसीलदार अस्सर डोडा में किया। याची ने दलील दी कि कोर्ट के 28 अक्तूबर 2014 को दिए गए स्टे आदेश का उल्लंघन करके अस्सर डोडा में उसका तबादला कर दिया। मूल याचिका के उद्देश्य को नजर अंदाज किया गया है।
न्यायाधीश जनक राज कोतवाल ने पाया सरकारी कर्मचारी के पास ऐसा कोई अधिकार नहीं है कि वह अपनी मर्जी से तबादला हासिल कर सके। ट्रांसफर का मामला संविधान के अनुच्छेद 226 व राज्य के संविधान की धारा 103 का मामला है। अगर इस पर कोई फैसला किया गया तो कोर्ट अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाएगा। जानबूझकर इस मामले में कोई आदेश देना गलत होगा और याचिका को रद्द कर दिया।