वफादारी तो इसे कहते हैं। ‘डब्बू’ ने अपनी जान गंवा कर अपने मालिक को खूंखार तेंदुए से बचा लिया। यदि उसने तेंदुए पर हमला नहीं बोला होता तो पंचायत सराड़ निवासी बलवान सिंह के साथ अनहोनी हो चुकी होती।
दर्दनाक पहलू यह है कि ‘डब्बू’ खुद खूनी पंजे का शिकार हो गया। ‘डब्बू’ कोई और नहीं बलवान सिंह का पालतू कुत्ता था।
दरअसल, हुआ यूं कि पंचायत सराड़ निवासी बलवान सिंह वीरवार की रात जब अपने घर से बाहर निकला तो अचानक एक तेंदुए ने उस पर हमला करने का प्रयास किया। यह देखते ही उसके पालतू कुत्ते ‘डब्बू’ ने पलक झपकते ही तेंदुए पर अपनी जान की परवाह किए बिना हमला बोल दिया।
कुत्ते और तेंदुए को उलझते देख बलवान सिंह अपनी जान बचा कर भाग खड़ा हुआ। कुछ ही पल में कुत्ते की आवाज बंद हो गई। तेंदुआ वहां से चला गया। डब्बू का क्षत-विक्षत शव वहां पड़ा रह गया। सुबह में जब यह खबर गांव में फैली तो सब के सब स्तब्ध थे।
कुत्ते का मालिक बलवान सिंह को डब्बू खोने का मलाल था। उसने रुआंसा होकर कहा कि आज डब्बू नहीं होता तो शायद मैं नहीं होता। पंचायत के सरपंच सुदेश चंद्र ने कहा कि पंचायत में इस प्रकार के मामले पहले भी पेश आ चुके हैं। संबंधित विभाग से तेंदुए को पकड़ने के लिए गांव में पिंजरा लगाने की मांग की गई है, लेकिन अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए।