जम्मू-कश्मीर में अब कोरोना की तीसरी लहर धीमी पड़ गई है। बीते कई दिनों से किसी संक्रमित मरीज की मौत न होना अच्छा संकेत माना जा रहा है। कोरोना की दूसरी लहर की तुलना में तीसरी लहर कम घातक रही। हालांकि इसमें दैनिक संक्रमित मामलों ने पिछले सारे रिकॉर्ड तोड़े, लेकिन मृत्युदर में कमी रही। विशेषज्ञों के अनुसार 18 और अन्य आयु वर्ग में पर्याप्त टीकाकरण प्रमुख रूप से ओमिक्रॉन वैरिएंट के आगे विशेष कवच बना। इसमें अधिकांश संक्रमित कम बीमार या बिना लक्षण वाले रहे। जबकि दूसरी लहर में टीकाकरण न होने के कारण डेल्टा प्लस ने अधिक कहर बरपाया था।
सबसे अधिक 2420 लोगों की कोविड से मौत हुई
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार मार्च, 2021 से जुलाई, 2021 के बीच दूसरी लहर अधिक सक्रिय रही। इस दौरान 194958 लोग संक्रमित हुए, लेकिन सबसे अधिक 2420 लोगों की कोविड से मौत हुई। इसमें कोरोना के पीक पर होने पर दैनिक आधार पर मौतों का आंकड़ा 70 से भी पार चला गया था।
जम्मू जिले में सबसे अधिक 776 मरीजों की कोरोना से जान गई
सभी अस्पताल संक्रमित मरीजों से खचाखच भरे रहे। हालांकि दूसरे राज्यों की तुलना में ऑक्सीजन की कमी की अधिक समस्या नहीं रही। दूसरी लहर में जम्मू संभाग के जम्मू जिले में सबसे अधिक 776 मरीजों की कोरोना से जान गई। इसके अलावा जिला राजोरी में 184, कठुआ में 100, डोडा में 73, पुंछ में 74 लोगों की कोविड से मौत हुई।
तीसरी लहर में जान गंवाने वालों में अधिकांश पहले से बीमार और बुजुर्ग
तीसरी लहर के शुरू होने पर 18 से अधिक आयु वर्ग में टीकाकरण के लगभग सौ फीसदी लक्ष्य को पूरा कर लिया गया था, जिसके बाद 15 से 17 आयु वर्ग में किशोरों को कवर किया गया। नवंबर, 2021 से फरवरी, 2022 के मध्य तक जम्मू-कश्मीर में 119638 नए संक्रमित मामले मिले। इनमें 313 लोगों की मौत हुई है।
टीके की खुराक ले चुके अधिकतर लोग अधिक प्रभावित नहीं
इसमें अधिकांश मरने वालों की उम्र 40 से 90 वर्ष के बीच की है, जो विभिन्न बीमारियों से ग्रस्त थे। तीसरी लहर ने पहले से बीमार लोगों को अपनी चपेट में अधिक लिया, जबकि टीके की खुराक ले चुके अधिकतर लोग अधिक प्रभावित नहीं हुए।
कोविड वैक्सीन की खुराक ने प्रमुख रूप से लोगों को तीसरी लहर से बचाने का काम किया है। हालांकि जान गंवाने वाले कई लोगों ने टीकाकरण नहीं करवाया था। वहीं, डेल्टा की तुलना में ओमिक्रॉन अधिक प्रभावशाली नहीं था। इसमें संक्रमण का प्रसार तेजी से होता है, लेकिन अधिक जानलेवा नहीं रहा। कोविड का खतरा अभी भी पूरी तरह से टला नहीं है, जिसके बचाव के लिए सभी वर्ग के लोगों को कोविड उपयुक्त व्यवहार का पालन करना होगा और वैक्सीन लगवाना सुनिश्चित करना होगा। - डॅा. संदीप डोगरा, एसोसिएट प्रोफेसर, माइक्रो बायोलॉजी विभाग, जीएमसी जम्मू