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महबूबा ने एक तीर से साधे कई निशाने, विरोधियों को कड़ा संदेश

Tue, 05 Apr 2016 11:53 AM IST
बृजेश कुमार सिंह, अमर उजाला/जम्मू

सार

  • भाजपा के साथ गलबहियां अल्ताफ को पड़ी भारी
  • कर्रा सहित पार्टी में धुर विरोधियों को दिया कड़ा संदेश
  • पूरे प्रकरण से भाजपा को भी आईना दिखाने की कोशिश
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महबूबा मुफ्ती - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
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पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने पार्टी के कद्दावर नेता अल्ताफ बुखारी समेत चार को मंत्रिमंडल से बाहर का रास्ता दिखाकर एक तीर से कई शिकार किए हैं। उन्होंने पार्टी में अपने विरोधियों को तो कड़ा संदेश दिया ही है, साथ ही यह भी साफ कर दिया है कि सब कुछ उनकी इच्छा के अनुसार ही चलेगा। 
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अल्ताफ बुखारी को पिछले दिनों सरकार गठन के मुद्दे पर भाजपा के साथ गलबहियां करने की सजा मिली। इसके साथ ही उन्होंने इस पूरे प्रकरण से भाजपा को भी यह संदेश देने की कोशिश की है कि वे गलत कामों तथा जोड़तोड़ की राजनीति को कतई बर्दाश्त नहीं करेंगी। 

मुफ्ती के निधन के बाद सरकार गठन में देरी होने पर पीडीपी के कुछ नेताओं ने भाजपा के साथ मिलकर सरकार गठन की कोशिशें शुरू की थीं। इनमें अल्ताफ बुखारी ने भाजपा नेताओं के साथ जम्मू में बैठक भी की थी। यह बात पार्टी प्रमुख को नागवार लगी। इस प्रयास को पार्टी विरोधी गतिविधियों के रूप में देखा गया। इसके साथ ही पार्टी सांसद कर्रा ने भी उनके नाम पर आपत्ति जताई थी। 
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पार्टी उनके रहमोकरम पर नहीं है

पीडीपी की अध्यक्षता महबूबा मुफ्ती - फोटो : PTI
माना जा रहा है कि इन्हीं सब वजहों से उन्हें बाहर का रास्ता दिखाया गया। महबूबा ने अपने इस फैसले से पार्टी सांसद कर्रा को भी कड़ा संदेश दिया है। उन्हें यह बताने की कोशिश की है कि पार्टी उनके रहमोकरम पर नहीं है। वे गठबंधन से लेकर मंत्रियों के नाम तथा अन्य मसलों पर आपत्ति जताते रहे हैं। 

इसके अलावा जावेद मुस्तफा मीर, राज्यमंत्री रहे अशरफ मीर व अब्दुल मजीद पाडर को बेहतर प्रदर्शन न करने के आरोप में हटाया गया है। पीडीपी सूत्रों ने बताया कि पार्टी में पदाधिकारी कै तौर पर इन्हें स्थान दिया जा सकता है। 
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बेबाकी ने तो नहीं ली सुखनंदन की कुर्सी 

न‌िर्मल स‌िंह भाजपा व‌िधायक दल के नेता हैं। - फोटो : Amar Ujala
भाजपा के धाकड़ नेता सुखनंदन कुमार को दोबारा मंत्रिमंडल में मौका नहीं दिए जाने से हर कोई भौंचक है। वह लगातार दूसरी बार विधानसभा के सदस्य चुने गए हैं। माना जा रहा है कि उनकी बेबाकी भाजपा नेतृत्व को नागवार लगी और उन्हें इसकी कीमत चुकानी पड़ी। 

उधमपुर से निर्दलीय विधायक और भाजपा कोटे से राज्यमंत्री रहे पवन गुप्ता के खिलाफ पार्टी विधायकों ने बगावती तेवर अपना लिए थे। विधायकों ने निर्दलीय को मंत्रिमंडल में स्थान देने का विरोध करते हुए कहा था कि निर्दल के बजाय पार्टी के विधायकों को मौका दिया जाना चाहिए ताकि कार्यकर्ताओं की बात सुनी जाए। यही वजह है कि क्षेत्रीयता का ख्याल रखते हुए रियासी विधायक अजय नंदा को मौका दिया गया। 
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