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साथियों के गम में बच्चों को रोता देख रो पडे स्कूल के टीचर

Sat, 14 May 2016 11:07 AM IST
रोहित गुप्ता, अमर उजाला/उधमपुर
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लढ़वाल मिडिल स्कूल में शुक्रवार को पत्थर दिल इनसान को भी भावुक कर देने वाला दृश्य उपस्थित था। - फोटो : Amar Ujala
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जिस स्कूल के तीन बच्चे नाले में बहे वह स्कूल शुक्रवार को खुला तो जरूरी, लेकिन स्कूल में भी मातम ही पसरा हुआ था। स्कूली बच्चे अपने साथियों के गम में फफक-फफक कर रो रहे थे। एक-दूसरे को ढांढस बंधा रहे थे। कोई कहता- राकेश बहुत अच्छा लड़का था। वह कभी किसी से नहीं झगड़ता। तो कोई कहता शिफाली कितनी प्यारी थी। वह अब कभी नहीं मिलेगी...।
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लढ़वाल मिडिल स्कूल में शुक्रवार को पत्थर दिल इनसान को भी भावुक कर देने वाला दृश्य उपस्थित था। अपने साथियों से बिछुड़ने का ऐसा सदमा बच्चों को लगेगा, यह कल्पना नहीं की जा सकती थी। हर कोई इन बच्चों को समझाने की कोशिश करते, पर उनके आंसू नहीं थम रहे थे।

फिर रोते हुए बच्चे ही एक-दूसरे को हाथ पकड़ कर ऐसे ढांढस बंधाते थे, जैसे कह रहे हों कि सब ठीक हो जाएगा। रोते हुए इन बच्चों ने कहा कि वीरवार को छुट्टी के बाद उन्होंने हाथ हिलाकर हम सबको पायल और शिफाली ने बाय किया था। उन्हें क्या पता था कि उनका यह हाथ हिलाना अंतिम बार होगा। ऐसी स्थिति में स्कूल के स्टाफ भी रो पड़े।
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8वीं कक्षा में पढ़ने वाली अंजली और रजनी भी अपने साथ राकेश की मौत पर खूब रो रही थी। वह कह रही थी कि राकेश बड़ा शांत स्वभाव का था। हर किसी की मदद करता था वह। 7वीं कक्षा की पायल देवी की सहेली भी काफी गमगीन थीं।

पायल की सहेली मैविश, रिया, शालू ने बताया कि उनकी सहेली पायल स्कूल में हंसती रहती थी। सभी को हंसाती रहती थी। उसकी बड़ी याद आती है। प्रथम कक्षा में पढ़ने वाली शिफाली को तो हर कोई प्यार करता था। कोई उसे उठाता तो कोई उसे दुलारता था।

मासी-भांजी को छोड़ने गया था राकेश

cloud burst - फोटो : Amar Ujala
गांव के लोगों ने बताया कि हादसे के शिकार राकेश का घर तो ऊपर था। बारिश होने के कारण वह मासी-भांजी को छोड़ने उनके घर तक जा रहा था। राकेश अपने कंधे पर मासूम शिफाली को लेकर नाला पार करा रहा था और बच्ची की मासी पायल भी साथ में थी। इस बीच पायल का पैर फिसलने से वह बहने लगी।

घबराकर राकेश ने उसे बचाने का प्रयास किया। इस दौरान पानी का काफी तेज बहाव होने से वह भी लड़खड़ा कर गिर गया। इसके चलते उसके कंधे पर सवार शिफाली में पानी में बहती चली गई। जिस जगह पर हादसा हुआ, वहां से इन बच्चियों का घर मात्र 25 मीटर की दूरी पर था।

वीरवार को नाले में बहे तीन स्कूली बच्चों में से दो के शव वीरवार देर शाम तक बरामद हो गए थे, लेकिन एक अन्य पायल का शव नहीं मिल पाया था। शुक्रवार की सुबह फिर से तलाशी शुरू की गई। इस दौरान घटनास्थल से कई किलामीटर दूर चकुआ नाले से उसका शव मिला। उसके बाद तीनों के अंतिम संस्कार किया गया।

शुक्रवार की सुबह गांव लढ़वाल में शिक्षा विभाग की एक जांच कमेटी भी पहुंची और बच्चों की मौत मामले की छानबीन की। इसकी रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को सौंपी जाएगी। जांच कमेटी में जेडईओ मोहम्मद अमीन और अन्य शामिल थे।
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बच्चों को दी गई श्रद्धांजलि

cloud burst - फोटो : Amar Ujala
शुक्रवार को बटोत के अलावा लढ़वाल और दूसरे स्कूलों में बच्चों को श्रद्धांजलि दी गई। शुक्रवार को स्कूलों में बच्चे तो गए, लेकिन श्रद्धांजलि के बाद बच्चों को छुट्टी दे दी गई। बटोत के जेडईओ मो. अमीन ने कहा कि हायर सेकेंडरी स्कूल बटोत, गर्ल्स हाई स्कूल बटोत, मिडिल स्कूल लढ़वाल और दूसरे अन्य स्कूलों में बच्चों का श्रद्धांजलि देने के बाद बच्चों को छुट्टी दे दी गई।

वीरवार को उत्पन्न हुई त्रासदी जैसी स्थिति के कारण शुक्रवार को भी लोग सहमे हुए थे। वीरवार की शाम का मंजर लोग भूल नहीं पा रहे थे। हालांकि शुक्रवार को पानी का वैसा बहाव तो नहीं था, लेकिन बिखरे हुए पत्थर तबाही जैसे हालात को बयां कर रहे थे। बादल फटने के कारण यहां की नालियाें की शक्ल नालों जैसी हो गई।

छोटे नाले बहुत बड़े हो गए। नालों के बीच बड़े-बड़े पत्थर आ गए हैं। उधर, लोगों की जमीनें बह गई हैं। नालों में बहे घरों के सामान को लोग इकट्ठा कर रहे थे। कुद के सीआरपीएफ  का बंकर भी बह गया था। बंकर में लगी टीन और अन्य सामान इकट्इा किया जा रहा था।
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