जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री और नेशनल कांफ्रेंस के कार्यकारी अध्यक्ष उमर अब्दुल्ला ने बुधवार को कहा कि पीडीपी-भाजपा सरकार ने दस महीने तक राज्य के लोगों को सताने के लिए बाढ़ राहत और विकास कोष पर रोक लगाई थी। इस पर अब कोई संदेह नहीं रह गया है। जिन्होंने अब अत्यधिक रूप से अवसरवाद के इस असफल रहे गठबंधन को नकार दिया है।
मध्य कश्मीर के बडगाम जिले के अपने चुनावी क्षेत्र बीरवाह के दौरे के दौरान पत्रकारों से बात करते हुए उमर अब्दुल्ला ने कहा कि राज्यपाल शासन के दौरान बाढ़ पीड़ितों के लिए कुछ पैसा रिलीज किया गया। युद्ध स्तर पर झेलम नदी की ड्रेजिंग का कार्य शुरू किया गया और साथ ही उन ठप विकास परियोजनाओं को शुरू किया गया, जो पीडीपी-भाजपा गठबंधन द्वारा पदभार संभाले जाने से पहले शुरू की गई थी।
उन्होंने कहा कि पीडीपी-भाजपा शासन के दौरान केंद्र की ओर से धन का कोई नई प्रवाह नहीं था, जिससे यह साबित होता है कि राज्य में पीडीपी-भाजपा सरकार ने जानबूझ कर लोगों को घुटने वाली स्थिति में रखा। साथ ही उन्हें विकास एवं राहत से भी वंचित रखा गया।
उन्होंने कहा कि पीडीपी-भाजपा सरकार की सबसे बड़ी अभियोग पीडीपी और भाजपा के बीच यह कभी न खत्म होने वाली सरकार के गठन के नाटकीय प्रदर्शन के प्रति लोगों की पूरी उदासीनता थी। उमर ने कहा कि अब राज्य के लोगों ने सरकार गठन कर बात करना बंद कर दिया है। उन्होंने कहा कि यह न केवल पीडीपी-भाजपा गठबंधन और उसके विफल सरकार की एक गंभीर और जोरदार अभियोग है लेकिन यह जम्मू-कश्मीर जैसे राज्य के संस्थागत लोकतंत्र के भविष्य के लिए एक खतरा बना हुआ है, जहां सनक दीर्घकालिक परिणाम हैं।
राजस्थान में कश्मीरी छात्रों के उत्पीड़न की निंदा
उमर अब्दुल्ला
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उमर के अनुसार राज्य में लोगों ने भारी संख्या में मत का इस्तेमाल किया और आज वे निराश और मोहभंग हैं, जबकि पीडीपी-भाजपा गठबंधन में होने के बावजूद निर्वाचित सरकार से राज्य के लोगों को वंचित रखे हुए हैं।
इसके अलावा उन्होंने जम्मू कश्मीर के छात्रों के कलकत्ता और हाल ही में राजस्थान की मेवाड़ विश्वविद्यालय में हुए उत्पीड़न की निंदा की। उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाओं को रोकने की जिम्मेदारी केंद्र और विशेष रूप से राज्य सरकारों की बनती है, जिसमें किसी न किसी बहाने से जम्मू कश्मीर के छात्रों को निशाना बनाया जाता है।
उन्होंने यह भी कहा कि आप उन आरोपियों को जिन्होंने छात्रों की पिटाई की उन्हें गिरफ्तार करने के बजाए गौमांस खाने के शक पर कश्मीरी छात्रों को गिरफ्तार करना गलत है। उन्होंने कहा कि जम्मू कश्मीर के छात्रों के साथ ऐसा व्यवहार नहीं बर्दाश्त किया जाएगा। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार सभी राज्य सरकारों को निर्देश दें कि कोई भी हमारे राज्य का छात्र असुरक्षित महसूस न करे और न भविष्य में उत्पीड़न का शिकार हो।
अपने इस दौरे के दौरान उमर अब्दुल्ला ने विकास कार्यों का जायजा लिया। इसके अलावा उन्होंने चुनावी क्षेत्र की विभिन शासकों को मैक्डमाइज करने के लिए 20 लाख रिलीज किए। उनके समक्ष पॉलीटिकल सेक्रेटरी तनवीर सादिक के अलावा अन्य नेकां नेता भी थे।